Narendra Modi: नरेंद्र मोदी ने रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, ऐसा रहा उनका राजनीतिक सफर
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 09 Jun 2024 10:39 PM
Swearing-in ceremony of new Union govt
Narendra Modi: नरेंद्र मोदी ने तीसरा बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच डाला है. लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले वो देश के दूसरे पीएम बन गए हैं. इससे पहले यह उपलब्धि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम दर्ज था.
Narendra Modi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी ने रविवार को लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया. इसके साथ ही वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता और जवाहरलाल नेहरू के बाद दूसरे ऐसे नेता बन गए हैं. बहुत कम ही लोगों ने सोचा होगा कि भाजपा का कोई नेता यह उपलब्धि हासिल कर सकेगा.
भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में विफल रही
मोदी को तीसरे कार्यकाल में जनादेश पूर्व के दो कार्यकालों की तरह नहीं मिला है. इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में विफल रही. चुनाव से पूर्व भाजपा ने चार सौ पार का नारा दिया था लेकिन वह अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ तीन सौ के आंकड़े को भी पार नहीं कर सकी. इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सहित कई हिन्दी पट्टी के क्षेत्रों में भाजपा के रथ को रोकने में सफलता हासिल की. यही कारण रहा कि नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव परिणामों को मोदी की ‘नैतिक हार’ करार दिया। कांग्रेस को इस चुनाव में 99 सीटों पर सफलता मिली. यह भाजपा की विशाल राजनीतिक उपस्थिति का ही परिणाम है कि लगातार तीसरे लोकसभा चुनाव में उसने 240 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल का तमगा हासिल किया. भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 293 सीटें जीती हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे किसी भी चुनाव-पूर्व गठबंधन की सबसे बड़ी सफलता करार दिया है.
मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
चुनावों से मिली चुनौतियों के बावजूद, आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति 73 वर्षीय मोदी के इर्द-गिर्द ही घूमने वाली है. हालांकि, इस दौरान उन्हें गठबंधन की राजनीति के विभिन्न पहलुओं का सामना करना पड़ेगा. गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद राज्य में हुए दंगों के साये में 2002 में गुजरात विधानसभा चुनावों में पहली बार भाजपा का नेतृत्व करने के बाद से मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
8 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़े थे पीएम मोदी
नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर के एक गुजराती परिवार में हुआ. वे अति पिछड़ा वर्ग परिवार से आते हैं, जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों में से है. मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया. 8 साल की आयु में वे आरएसएस से जुड़े. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपना घर छोड़ दिया. दो साल तक भारत भर में यात्रा की, और अनेकों धार्मिक केन्द्रों का दौरा किया. 1970 के करीब वो गुजरात लौटे उसके बाद अहमदाबाद चले गए. 1971 में मोदी आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए. 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए अज्ञातवास में रहना पड़ा. 1985 में वे बीजेपी से जुड़े. मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की.
2001 में बने थे गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी पहली बार 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने. उसके बाद लगातार 4 बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज की और 282 सीट पर कब्जा जमाया. यह पहला मौका था, जब बीजेपी को केंद्र में बहुमत मिली थी और अपने दम पर सरकार बनी. उसके बाद उनके नेतृत्व में बीजेपी ने दोबारा लोकसभा का चुनाव लड़ा और 2014 की तुलना में और अधिक सीटें जीती. 2019 में बीजेपी को कुल 303 सीटों पर जीत मिली. जबकि एनडीए को 352 सीटें मिली.
कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी को कड़े फैसले लेने वालों में गिना जाता है. अपने प्रधानमंत्री के 10 साल के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने कई ऐसे फैसले लिए, जिसने देश की दशा और दिशा बदल दी. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का दम दिखाया. इसके अलावा तीन तलाक हटाना, सीएए लागू करना. राम मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाना. कोरोना काल में वैक्सीन निर्माण से लेकर गरीबों को मुफ्त अनाज देना का काम किया. साथ ही मोदी सरकार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर जबरदस्त काम हुए.
नेहरू 1947 में स्वतंत्रता के बाद से सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय प्रधानमंत्री रहे
नेहरू 1947 में स्वतंत्रता के बाद से सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय प्रधानमंत्री रहे हैं. उनकी मृत्यु 27 मई 1964 को हुई थी और वह उस समय भी देश के प्रधानमंत्री थे. साल 1952 में हुए पहले आम चुनाव में जीत के बाद वह पहली बार प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे. इसके बाद 1957 और 1962 के आम चुनावों में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की और नेहरू फिर देश के प्रधानमंत्री बने. नेहरू की मौत के बाद गुलजारी लाल नंदा भारत के कार्यकारी प्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने लालबहादुर शास्त्री की मौत के बाद फिर एक बार कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में सेवाएं दी. इंदिरा गांधी 24 जनवरी, 1966 को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं. वह मार्च 1977 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं और 14 जनवरी 1980 को फिर से प्रधानमंत्री बनीं. देश में पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री होने का श्रेय मोरारजी देसाई को जाता है. वह 24 मार्च, 1977 को भारत के पहले गैर-कांग्रेस प्रधानमंत्री बने थे. मोरारजी देसाई अपना कार्यकाल पूरा किए बिना इस्तीफा देने वाले भी पहले प्रधानमंत्री थे. राजीव गांधी सबसे कम उम्र के भारतीय प्रधानमंत्री थे. उन्होंने 40 साल की उम्र में ही प्रधानमंत्री का पद संभाला था. पीवी नरसिम्हा राव दक्षिण भारत से आने वाले पहले प्रधानमंत्री थे। जनता दल के नेता एचडी देवेगौड़ा भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जो राज्यसभा के सदस्य थे. डॉ मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. मोदी ने उनका ही स्थान लिया था.
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