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Namaz At Shaniwarwada: शनिवार वाडा में महिलाओं के नमाज पर बवाल, हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, वारिस पठान ने BJP पर बोला हमला

Updated at : 20 Oct 2025 5:58 PM (IST)
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Waris Pathan

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान

Namaz At Shaniwarwada: महाराष्ट्र में पुणे शहर के ऐतिहासिक शनिवार वाडा (namaz at Shaniwarwada) में मुस्लिम महिलाओं के नमाज अदा करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके साथ ही उस जगह को गोमूत्र छिड़ककर शुद्ध किया गया और शिव वंदना की गई. विरोध प्रदर्शन और शुद्धिकरण किए जाने पर एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान (Waris Pathan) ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया.

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Namaz At Shaniwarwada: शनिवार वाडा में मुस्लिम महिलाओं के नमाज अदा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बवाल शुरू हो गया. वीडियो को बीजेपी की राज्यसभा सदस्य मेधा कुलकर्णी ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट किया और मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है. शनिवार वाडा नमाज अदा करने की जगह नहीं है. हम प्रशासन से इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं.’’

3 मिनट की नमाज ने आपको परेशान कर दिया : वारिस पठान

शनिवारवाड़ा में महिलाओं के नमाज अदा करने का एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद शुद्धिकरण किए जाने पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “भाजपा हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद को नष्ट कर रही है. वे केवल नफरत फैला रहे हैं. अगर 3-4 मुस्लिम महिलाओं ने जुम्मे के दिन एक ही स्थान पर नमाज़ अदा की, तो इससे क्या परेशानी हुई? जब हिंदू ट्रेनों में या हवाई अड्डों पर गरबा करते हैं, तो हमने कभी आपत्ति नहीं की. एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक सभी के लिए हैं. 3 मिनट की नमाज ने आपको इतना परेशान कर दिया. लेकिन संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है. तो, आप कितनी नफरत फैलाएंगे? आपको अपने मन को शुद्ध करना चाहिए, उस मन को जो नफरत पालता है.”

शनिवार वाडा को पेशवाओं ने 1736 में बनवाया था

शनिवार वाडा 1736 में पेशवाओं द्वारा निर्मित एक 13 मंजिला महल था। इसे पेशवा शक्ति के केंद्र और पुणे के इतिहास और संस्कृति के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित दर्जा प्राप्त है. वर्ष 1828 में आग लगने से यह नष्ट हो गया था और अब यहां केवल किले की दीवारें और विशाल कीलों से जड़े दरवाजे ही बचे हैं.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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