Muslim Reservation Karnataka: सरकारी ठेकों में मुसलमानों को मिलेगा चार फीसदी आरक्षण, जोरदार हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक

Published by : Pritish Sahay Updated At : 21 Mar 2025 8:31 PM

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Muslim Reservation

Muslim Reservation: कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार फीसदी आरक्षण दिया जाएगा, शुक्रवार को जोरदार हंगामे के बीच विधानसभा में विधेयक पारित हो गया है. विपक्षी दल बीजेपी ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताया है. बीजेपी ने इसे कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.

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Muslim Reservation: कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को काफी गहमागहमी दिखी. सदन में जमकर हंगामा भी हुआ. सदन में विपक्षी दल बीजेपी के कड़े विरोध के बीच सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए चार फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया गया. इसके विरोध में बीजेपी विधायक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर के आसन के समीप आ गए और उन पर कागज फेंकने लगे. इसके बाद खादर के निर्देश पर मार्शल ने उन विधायकों को बाहर निकाल दिया.

विपक्ष ने कहा असंवैधानिक

विपक्ष के नेता आर अशोक ने विधेयक को असंवैधानिक कहा है. विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता संशोधन विधेयक 2025 को पेश किया. बीजेपी ने विधेयक को लेकर कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया. शुक्रवार को जैसे ही सदन में विधेयक पारित हुआ बीजेपी के नेता नारेबाजी करते हुए सदन में घुस गए. वे स्पीकर की सीट पर चढ़ गए. स्पीकर पर कागज फेंके. इसके बाद उन्हें जबरन मार्शल बुलाकर वहीं से निकाला गया.

सिद्धारमैया सरकार ने बजट में की थी घोषणा

इससे पहले बीते शुक्रवार को मंत्रिमंडल ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत दो करोड़ रुपये तक के सार्वजनिक कामों और एक करोड़ रुपये तक के माल/सेवा खरीद अनुबंध में मुसलमानों को 4 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सात मार्च को पेश किए गए अपने 2025-26 के बजट में इसकी घोषणा की थी.

फिलहाल कैसा है समीकरण

फिलहाल कर्नाटक में सिविल कार्य ठेकों में एससी/एसटी के 24 फीसदी जबकि ओबीसी से संबंधित श्रेणी-1 के लिए चार फीसदी और श्रेणी-2ए के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण है. चार प्रतिशत आरक्षण के साथ ओबीसी की श्रेणी-2बी के तहत मुसलमानों को जोड़ने की मांग की गई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने कहा है कि वह विधेयक को कोर्ट में चुनौती देगी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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