Watch Video : ऑपरेशन सिंदूर में जीते या हारे? क्या जवाब देगा एक पाकिस्तानी जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Aug 2025 8:14 AM

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Upendra Dwivedi in IIT Madras

Watch Video : भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला कर जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया. थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देखें पाकिस्तान पर तंज कसते हुए क्या कहा.

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Watch Video : थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान पर जोरदार तंज कसा. उन्होंने कहा कि युद्ध में कहानी गढ़ने (नैरेटिव मैनेजमेंट) की बड़ी भूमिका होती है. आईआईटी मद्रास में उन्होंने कहा, ‘अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि जीते या हारे, तो वह एक  ही बात कहता नजर आएगा,  ‘मेरा चीफ फील्ड मार्शल बन गया है, जरूर हम जीते होंगे, तभी वह फील्ड मार्शल बना.’ उपेंद्र द्विवेदी ने क्या कहा देखें ये वीडियो

जनरल द्विवेदी का इशारा पाकिस्तान सरकार द्वारा अपने सेना प्रमुख असीम मुनीर को पांच सितारा जनरल और फील्ड मार्शल बनाने की ओर था. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए सशस्त्र बलों को पूरी तरह खुली छूट दी थी.

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ऑपरेशन सिंदूर  को लेकर क्या बोले जनरल द्विवेदी?

जनरल द्विवेदी ने कहा, “22 अप्रैल को पहलगाम की घटना ने पूरे देश को हिला दिया. अगले दिन 23 अप्रैल को एक बैठक हुई. यह पहली बार था जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा, ‘अब बहुत हो गया.’ तीनों सेना प्रमुख सहमत थे कि बड़ा कदम उठाना जरूरी है. सरकार की ओर से आदेश था, ‘आप तय करें क्या करना है. यह भरोसा, राजनीतिक दिशा और स्पष्टता हमने पहली बार देखी.’ उन्होंने आगे कहा, “ऐसा आदेश मनोबल बढ़ाता है और हमारे कमांडरों को जमीन पर जाकर अपने विवेक से कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिससे वे तुरंत और प्रभावी कदम उठा सके.”

सफलता का बड़ा कारण था स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति : ए.पी. सिंह

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय केंद्र सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिया. बेंगलुरु स्थित एचएएल मैनेजमेंट एकेडमी में उन्होंने कहा, “सफलता का बड़ा कारण था स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति. हमें साफ निर्देश मिले और कोई बाहरी प्रतिबंध नहीं था. जो सीमाएं थीं, वे हमने खुद तय कीं. नियम और कार्रवाई का तरीका भी हमने ही तय किया. तनाव को कैसे नियंत्रित करना है, यह भी हमारा निर्णय था. योजना बनाने और उसे लागू करने की पूरी आजादी हमारे पास थी, जिससे हम सफल हो सके.”

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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