राम मंदिर चंदा विवाद पर मोहन भागवत की पहली प्रतिक्रिया-राम-राम

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मोहन भागवत , फाइल फोटो

Mohan Bhagwat: राम मंदिर चंदा विवाद के उजागर होने के बाद से मोदी सरकार, आरएसएस और अन्य हिंदू संगठन विपक्ष के निशाने पर है. विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार और संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है. शनिवार को नागपुर में जब उनसे पत्रकारों ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने बहुत ही संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए केवल राम-राम कहा. पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि चंदा में कथित हेराफेरी से भगवान राम में लोगों की आस्था को धक्का पहुंचाने की कोशिश हुई है, तो वे बस छोटा सा जवाब देकर चले गए.

मोहन भागवत का यह बयान, संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने यह कहा था कि चंदा में हेरफेर के मामले से रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है. उन्होंने यह मांग भी भी की थी कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.

हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश

दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा था कि चंदा विवाद की घटना से बहुत दुखी और गुस्से में हूं. उन्होंने मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से दोषियों को सजा दिलाने की अपील की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि हिंदू विरोधी और देश विरोधी ताकतें हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए इस घटना का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. होसबाले ने राम भक्तों से धैर्य और संयम बरतने की अपील की थी.

चंदा विवाद के बाद से विपक्ष के निशाने पर है मोदी सरकार

श्रीराम मंदिर चंदा विवाद के सामने आने के बाद से मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. विपक्ष का यह कहना है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राममंदिर बनवाने का श्रेय खुद ले रहे हैं, तो उन्हें यहां हुई चंदा चोरी की जिम्मेदारी भी लेनी होगी. चंदा विवाद सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है. बावजूद इसके उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी अपने बयान में यह कहा था कि इस मामले में चंपत राय लापरवाही के दोषी हो सकते हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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