राज ठाकरे के बेटे को टोल प्लाजा पर रोका गया,भड़के मनसे कार्यकर्ता, तोड़फोड़ का वीडियो वायरल

Edited by Amitabh Kumar
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मामले को लेकर वावी थाने के एक अधिकारी ने मामले को लेकर जानकारी दी कि घटना की जांच की जा रही है और सीसीटीवी आदि की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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महाराष्ट्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ लोग टोल प्लाजा में तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता अमित ठाकरे को नासिक टोल प्लाजा पर रोका गया था जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की. रविवार तड़के मनसे कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाजा में कथित रूप से तोड़फोड़ की. मामले को लेकर एक अधिकारी ने बताया कि मनसे के संस्थापक राज ठाकरे के पुत्र अमित ठाकरे की कार पर लगे फास्टटैग में कुछ दिक्कत आने के कारण शनिवार रात करीब सवा नौ बजे उन्हें सिन्नार के गोंदे टोल प्लाजा पर कथित रूप से रोका गया था. वह मुंबई लौट रहे थे.

मनसे के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने रविवार देर रात करीब ढाई बजे टोल प्लाजा पर तोड़फोड़ की जिसका वीडियो सामने आया है. कार्यकर्ताओं ने वहां के पदाधिकारी से माफी मंगवायी. घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसपर लगातार प्रतिक्रिया आ रही है. वावी थाने के एक अधिकारी ने मामले को लेकर जानकारी दी कि घटना की जांच की जा रही है और सीसीटीवी आदि की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. हमें (टोल प्लाजा कर्मचारियों से) कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

एकनाथ शिंदे से मिले थे राज ठाकरे

मार्च के महीने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने मुलाकात की थी. जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गयी थी. मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात को लेकर जारी सियासी चर्चाओं के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि यह एक शिष्टाचार भेंट थी, इसमें कुछ राजनीतिक मुद्दा नहीं था. हमारी किसी गंभीर विषय पर चर्चा नहीं हुई है.

कौन हैं राज ठाकरे

राज ठाकरे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भतीजे हैं. वे अपने चाचा के नेतृत्व में बड़े हुए और युवा अवस्‍था में आते ही उन्‍होंने शिवसेना का साथ छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया और चाचा की राह पर आगे बढ़े. जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स के स्नातक राज ठाकरे ने किया. वे 2006 तक शिवसेना से जुड़े रहे थे, लेकिन वैचारिक मतभेदों की वजह से उन्‍होंने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया. मराठियों का दिल जीतने का वो भरकस प्रयास करते हैं. उन्‍होंने 2008 में महाराष्ट्र की प्रत्येक दुकान पर मराठी में बोर्ड लगाने की मांग की.

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2019 में अमित ठाकरे का विवाह हुआ

आपको बता दें कि साल 2019 में अमित ठाकरे का विवाह हुआ था. उनकी शादी में कई राजनीतिक हस्तियां पहुंची थीं. जिस दिन अमित ठाकरे के चाचा, उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, अमित नवी मुंबई में मजदूर आंदोलन में नजर आये थे.

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अमित ठाकरे की आदित्य ठाकरे से तुलना

साल 2000 में अमित ठाकरे आधिकारिक रूप से राजनीति में आये थे. इसके बाद से उनके सामने कई चुनौतियां आई. सबसे पहले उन्हें पिता की पार्टी डूबी हुई नैया को पार लगाना था लेकिन पांच के बाद भी मनसे कहीं टिकती नजर नहीं आती है. जानकार बताते हैं कि पार्टी के अंदर जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है. साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच भी सामंजस्य की कमी नजर आती है. आपको बता दें कि अमित ठाकरे की आदित्य ठाकरे से भी तुलना की जाती है जो महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं.

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अमित ठाकरे के बारे में ये भी जानें

अमित ठाकरे की बात करें तो वे कॉमर्स में ग्रैजुएट हैं. वह सोशल मीडिया में एक्टिव नजर आते हैं. जहां राज ठाकरे एक अच्छे कार्टूनिस्ट हैं तो वहीं उनके बेटे अमित उनके एक कदम आगे हैं. वह अच्छा स्केच बनाने में रुचि दिखाते हैं. एक बार उन्होंने अपने पिता राज ठाकरे का एक स्केच बनाया था जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया था.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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