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कोविड-19 संकट के बीच टेस्ट में फेल हुए मेक इन इंडिया वेंटिलेटर्स, इन अस्पतालों में हुआ परीक्षण

Updated at : 29 Jun 2020 10:29 AM (IST)
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कोविड-19 संकट के बीच टेस्ट में फेल हुए मेक इन इंडिया वेंटिलेटर्स, इन अस्पतालों में हुआ परीक्षण

कोरोना संकट (Corona crisis) के इस दौर में कोविड-19 (Covid-19 hospital) अस्पताल वेंटिलेटर्स की कमी से जूझ रहे हैं. इस बीच एक खबर यह भी आ रही है कि मुंबई के जेजे अस्पताल (JJ hospital) और संत जॉर्ज अस्पताल (St jeorge hospital) में हालिया इस्तेमाल में लाये जा रहे मेड इन इंडिया वेंटिलेटर्स टेस्ट में फेल हो गये हैं. इन अस्पतालों का कहना है कि इन वेंटिलेटर्स के जरिये कोविड-19 मरीज को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन (Oxygen) नहीं मिल पा रहा है. एक मशीन तो चालू होने के पांच मिनट बाद ही बंद हो गयी. इन अस्पतालों को पिछले महीने एक एनजीओ द्वारा यह वेंटिलेटर्स (Ventiloters) दिये गये थे. बता दे कि की महाराष्ट्र नें बढ़ते कोरोना मामलों के बीच वेंटिलेटर्स की भारी कमी हो गयी है.

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कोरोना संकट के इस दौर में कोविड-19 अस्पताल वेंटिलेटर्स की कमी से जूझ रहे हैं. इस बीच एक खबर यह भी आ रही है कि मुंबई के जेजे अस्पताल और संत जॉर्ज अस्पताल में हालिया इस्तेमाल में लाये जा रहे मेड इन इंडिया वेंटिलेटर्स टेस्ट में फेल हो गये हैं. इन अस्पतालों का कहना है कि इन वेंटिलेटर्स के जरिये कोविड-19 मरीज को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है. एक मशीन तो चालू होने के पांच मिनट बाद ही बंद हो गयी. इन अस्पतालों को पिछले महीने एक एनजीओ द्वारा यह वेंटिलेटर्स दिये गये थे. बता दे कि की महाराष्ट्र नें बढ़ते कोरोना मामलों के बीच वेंटिलेटर्स की भारी कमी हो गयी है.

जेजे अस्पताल और संत जॉर्ज अस्पताल को जो वेंटिलेटर्स सौंपे गये हैं उनका निर्माण दिल्ली स्थित एजीवीए हेल्थकेयर द्वारा किया गया है. प्रत्येक वेंटिलेटर कीमत ढाई लाख रुपये है. जो पूरी दुनिया में वेंटिलेटर की सबसे सस्ती दर है. जबकी दूसरी पारंपरिक वेंटिलेटर्स की कीमत 10 लाख रूपये तक आती है. हालांकि एजीवीए वेंटिलेटर्स का वजन मात्र साढ़े तीन किलो है और इसे चलाने में बहुत कम बिजली की खपत होती है. इसलिए उम्मीद थी की जिन कोविड-19 मरीजों की हालत गंभीर नहीं है वो इसे अपने घर ले जा सकते हैं.

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पर वेंटिलेटर्स पहले ही दौर के परीक्षण में फेल हो गये और दोनों की अस्पतालों ने इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किये. संत जॉर्ज अस्पताल ने तो 39 वेंटिलेटर्स वापस भी कर दिये हैं. जबकि जेजे अस्पताल ने 42 मशीनों को वापस ले जाने के लिए कहा है. इन अस्पतालों के डॉक्टर्स ने वेंटिलेटर्स को लेकर कहा कि किसी भी हाल में इस मशीन का इस्तेमाल कोविड-19 मरीजों के लिए नहीं किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मशीन के परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि इस मशीन से मरीज द्वारा निर्धारित मात्रा से 10 फीसदी अधिक ऑक्सीजन का ग्रहण किया गया. साथ ही मशीन शुरू होने के पांच मिनट बाद ही बंद हो गयी. फिर जब इन वेंटिलेटर्स को आइसीयू में भर्ती मरीजों पर जांच की गयी तो ऑक्सीजन की मात्रा में कमी देखी गयी. जबकी मरीजों की सुरक्षा के लिए आक्सीजन की मात्रा तय की जाती है.

डॉक्टर्स ने कहा कि एवीजीए के वेंटिलेटर्स से ना सिर्फ ऑक्सीजन ग्रहण करने की मात्रा में कमी आयी जबकि इसमें रीडिंग के दौरान भी विसंंगती पायी गयी. इसमें दिखाया गया की मरीज को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल रहा है जबकि यह निर्धारित मात्रा से कम था. वहीं जब मरीजों को दूसरे वेंटिलेटर्स में शिफ्ट किया गया तब उनके अंदर ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त हो गयी. मंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक जब इस समस्या के बारे में एवीजीए के इंजीनियर्स को संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद एवीजीए की ओर से कहा गया है कि वो अस्पतालों में नये वेंटिलेटर्स की सप्लाई करेंगे, लेकिन तब तक उन्हें पहले वाले की वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल करना होगा.

Posted By: Pawan Singh

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