महापर्व सतुआनी आज, कल मनेगा जुड़ शीतल पर्व

Updated at : 13 Apr 2020 9:16 AM (IST)
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महापर्व सतुआनी आज, कल मनेगा जुड़ शीतल पर्व

आस्था और विश्वास का महापर्व सत्तुआनी आज है, सतुआनी में दाल से बनी सत्तू खाने की परंपरा है. यह पर्व कई मायने में महत्वपूर्ण है. इस दिन लोग अपने पूजा घर में मिट्टी या पित्तल के घड़े में आम का पल्लो स्थापित करते हैं. सत्तू, गुड़ और चीनी से पूजा की होती है. इस दौरान सोना और चाँदी दान देने की भी परंपरा. पूजा के उपरांत लोग सत्तू, आम प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है.

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आस्था और विश्वास का महापर्व सत्तुआनी आज है, सतुआनी में दाल से बनी सत्तू खाने की परंपरा है. यह पर्व कई मायने में महत्वपूर्ण है. इस दिन लोग अपने पूजा घर में मिट्टी या पित्तल के घड़े में आम का पल्लो स्थापित करते हैं. सत्तू, गुड़ और चीनी से पूजा की होती है. इस दौरान सोना और चाँदी दान देने की भी परंपरा. पूजा के उपरांत लोग सत्तू, आम प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है.

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इसके एक दिन बाद 15 अप्रैल को जूड़ शीतल का त्योहार मनाया जाएगा. 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. इसी के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है. इस दिन पेड़ में बासी जल डालने की भी परंपरा है. जुड़ शीतल का त्योहार बिहार में हर्षोलास के साथ मनाया जाता है.

पर्व के एक दिन पूर्व मिट्टी के घड़े या शंख जल को ढंककर रखा जाता है, फिर जुड़ शीतल के दिन सुबह उठकर पूरे घर में जल का छींटा देते हैं। मान्यता है की बासी जल के छींटे से पूरा घर और आंगन शुद्ध हो जाता है. ये भी मान्यता है की जब सूर्य मीन राशि को त्याग कर मेष राशि में प्रवेश करता है तो उसके पुण्यकाल में सूर्य और चंद्र की रश्मियों से अमृतधारा की वर्षा होती है, जो आरोग्यवर्धक होता है. इसलिए इस दिन लोग बासी खाना भी खाते हैं.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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