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दो ग्राम के टिड्डी एक दिन में चट कर जाते हैं 35 हजार लोगों का खाना, इस बार भारत को भारी नुकसान की आशंका

By Prabhat Khabar Digital Desk
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 इस साल टिड्डी दल का प्रकोप 26 साल में सबसे भयावह है.
इस साल टिड्डी दल का प्रकोप 26 साल में सबसे भयावह है.
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देश के कई राज्यों में आतंक मचाने वाली टिड्‌डी इन दिनों लॉकडाउन में कोरोना वायरस के बाद दूसरी सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं. हरे भरे खेतों को देखते ही देखते चट करने वाली टिड्‌डी ने पिछले पाकिस्तान में खूब कहर बरपाया था. कई राज्यों में हजारों की संख्या में टिड्डी दल फसलों को चट कर जा रहे हैं. जिन प्रदेशों में टिड्डियों का दल पहुंच रहा है वहां खेतों में खड़ी हजारों एकड़ फसल खराब हो जा रही है.देश के 6 राज्यों में इसका हमला हो चुका है.

एचटी ने वैज्ञानिकों के हवाले से लिखा है कि एक टिड्डी दिनभर में 100 से 150 किमी तक उड़ सकती और 20 से 25 मिनट में ही पूरी फसल बर्बाद कर सकती है. इतना ही नहीं 4 करोड़ टिड्डियों का दल एक दिन में 35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है. इन्हीं सब कारणों से इसे 26 साल बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला माना जा रहा है. मौजूदा हमला पिछले महीने शुरू हुआ जब पाकिस्तानी की तरफ से टिड्डी दल राजस्थान आया और अन्य पश्चिमी राज्यों में फैल गया.

इन राज्यों में आतंक

राजस्थान और मध्य प्रदेश में आतंक मचाने के बाद टिड्डियों का दल बुधवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के झांसी पहुंच गया और यह अब महाराष्ट्र के रामटेक शहर की ओर भी बढ़ सकता है. सामान्य तौर पर टिड्डी दल के प्रकोप से अछूता रहने वाले पंजाब में भी इस बार इनके हमले की आशंका है. ओडिशा मे अलर्ट जारी किया गया है. फरीदाबाद स्थित टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, यह कोई नयी समस्या नहीं है और लंबे समय से हम इसका सामना कर रहे हैं. इस साल टिड्डी दल का प्रकोप 26 साल में सबसे भयावह है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार राजस्थान के 21 जिले, मध्य प्रदेश के 18 जिले, गुजरात के दो जिले और पंजाब के एक जिले में अब तक टिड्डी दल पर काबू पाने के लिए कदम उठाये गये हैं.

टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिये ड्रोन

राजस्थान के कृषि विभाग ने राज्य के कई जिले में टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिये कीटनाशक के छिड़काव के लिये एक ड्रोन की मदद ली है. भाषा के मुताबिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र के अनुसार टिड्डी दलों ने करीब 40 से 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर हमला किया है. लेकिन गेहूं, दलहन और तिलहन जैसी रबी की फसलों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है क्योंकि इनमें से अधिकतर की अब तक कटाई हो चुकी है. उन्होंने कहा, ‘अब पूरा ध्यान जून-जुलाई में मानसून आने से पहले प्रकोप रोकने पर है जब टिड्डियों में प्रजनन हो सकता है. अगर इसे नहीं रोका जा सका तो खरीफ की फसलों को खतरा हो सकता है.

टिड्डियों से बचने के लिए किए गये उपाय

टिड्डियों के हमले की आशंका के मद्देनजर दमकल वाहनों को पहले से ही तैयार किया गया है. इन कीटों को भगाने के लिये कीटनाशकों का गहन छिड़काव किया जा रहा है. साथ ही वाहनों पर डीजे तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लगाकर शोर किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि गत 22 एवं 24 मई को टिड्डियों के एक बड़े समूह ने झांसी जिले के कुछ इलाकों पर हमला किया था, लेकिन पहले से ही सतर्क प्रशासन एवं ग्रामीणों की मदद से आधे से अधिक टिड्डियों को मार डाला गया था.

भारत में ऐसे पहुंची टिड्‌डी

जानकारी के अनुसार उत्तरी हिंद और अरब सागर में 2018 में आए साइक्लोनों की वजह से सऊदी अरब में मौसम में भारी फेरबदल हुआ था. वहां बारिश के बाद रेगिस्तानी इलाकों में भी पानी भर गया था. यह वहीं अरब रेगिस्तान है जहां टिड्‌डी पायी जाती थी और इस मौसम में बदलाव के बाद वहां भयंकर टिड्‌डी दल सामने आए. अनियंत्रित यही टिड्‌डी दल अरब से यमन और ओमान पहुंचे गए. वहां भी बारिश ने टिड्‌डी को पनपने का मौका दिया. अब हवा के रूख के चलते पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंच चुकी टिड्‌डी दल किसानों में हड़कंप मचाए हुए है.

तो अपने आप मर जाती हैं टिड्‌डी

रिपोर्ट के मुताबिक, टिड्‌डी की उम्र महज 90 दिन होती है. एक टिड्‌डी एक दिन में अपने वजन के बराबर खाना खाती है और हवा में 5000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है. राजस्थान में बड़े-बड़े टिड्‌डी दल या झुंड दिख रहे हैं. एक्सपर्ट रिपोर्ट के अनुसार एक दल 740 वर्ग किलोमीटर तक बड़ा हो सकता है. इनसे दुनिया के करीब 60 देश प्रभावित हैं.

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