IRCTC/Indian railways News: Lockdown के दौरान रेलवे चला सकता है 300 स्पेशल ट्रेन! पढ़ें ये खास खबर

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 06 May 2020 12:17 PM

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Lockdown-3, Indian Railway, Migran Workers, Shramik Special Train : चार मई से देशभर में लॉकडाउन का तीसरा चरण जारी है जो 17 मई तक चलेगा. यदि आपको याद हो तो गृह मंत्रालय के निर्देश पर इंडियन रेलवे ने अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजूदरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए कई ट्रेनें शुरू की हैं.

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चार मई से देशभर में लॉकडाउन का तीसरा चरण जारी है जो 17 मई तक चलेगा. यदि आपको याद हो तो गृह मंत्रालय के निर्देश पर इंडियन रेलवे ने अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजूदरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए कई ट्रेनें शुरू की हैं. इन स्पेशल ट्रेनों को ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ का नाम रेलवे की ओर से दिया गया है.

रेल मंत्रालय की मानें तो सोमवार तक इस तरह के 58 स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था करने का काम किया जा चुका है. इधर रेल मंत्रालय के सूत्रों से ये बात सामने आ रही है कि अगले कुछ दिनों में इस तरह की 300 और ट्रेनें चलाने की मांग की जा सकती है, जिसके लिए रेलवे पूरी तरह से कमर कस चुका है.

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300 ट्रेनें चला सकती है रेलवे

रेल मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो इसके लिए केवल भेजने वाले और जहां पहुंचना है, उन राज्य की सरकारें आपस में बात कर ट्रेन चलवाने की मांग कर सकते हैं. इन ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों के अलावा विभिन्न राज्यों में फंसे स्टूडेंट्स, शरणार्थी, टूरिस्ट को भी घर भेजने की व्यवस्था की मांग रेलवे से की जा सकती है.

किराये पर विवाद

ट्रेनों में किराया वसूलने के नाम पर राजनितिक बयानबाजी का दौर सोमवार से जारी है. विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि विदेशों में फंसे लाखों लोगों को एयर इंडिया मुफ्त में भारत लेकर आयी, लेकिन गरीब मजदूरों से गांव जाने के पैसे वसूले जा रहे हैं. इसके बाद रेलवे ने स्पष्ट कहा कि किराया मजदूरों से नहीं वसूला जा रहा है बल्कि एक मानक किराया राज्य सरकारों से लिया जा रहा है.

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श्रमिक स्पेशल ट्रेन 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए

इंडियन रेलवे की ओर से ये साफ कहा गया है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन का केवल एक गंतव्य होगा. ट्रेन बीच में कहीं नहीं रुकेगी. यही नहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेन 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए चलाने का काम रेलवे करेगी. इस तरह की हर ट्रेन में 1000 से 1200 यात्रियों को बैठने की सुविधा रेलवे की ओर से की जाएगी.

इन ट्रेनों से कौन जा सकता है

लॉकडाउन की वजह से फंसे प्रवासी मजदूरों, छात्रों, कामगारों, टूरिस्ट्स को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने श्रमिक ट्रेनें चलाने का फैसला लिया. ये ट्रेनें केवल उन्हीं लोगों के लिए संचालित की जा रही हैं जो लॉकडाउन की वजह से फंस गए हैं. इसके लिए स्थानीय प्रशासन को आवेदन, यात्रियों का विवरण देना होगा जिसके बाद अनुमति मिलेगी. इन ट्रेनों को राज्य सरकार के अनुरोध पर चलाया जाएगा. यात्रियों को स्क्रीनिंग के बाद ट्रेन में बैठने दिया जाएगा.

ऐसे बुक करें टिकट

यदि आप अपने राज्य जाना चाहते है तो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सफर कर सकते हैं. इसके लिए आपको सबसे पहले स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर आवेदन करना होगा, इसके बाद वहां के नोडल अधिकारी जो सूची तैयार करेंगे वह रेलवे को सौंपी जाएंगी.स्टेशन पर केवल उन्हीं को पहुंचने के लिए कहा गया हैं, जिन्हें प्रशासन चुनेगा.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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