पाकिस्तान में छिप कर बैठे खालिस्तानी आतंकी लखबीर सिंह रोडे की मौत, यह बड़ी बात आई सामने

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 05 Dec 2023 8:57 AM

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लखबीर सिंह को लेकर केंद्र सरकार के पास जो दस्तावेज मौजूद हैं उसके अनुसार, ISYF ने यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में विभिन्न स्थानों पर सक्रिय था. इस बीच खबर है कि पाकिस्तान में छिप कर बैठे खालिस्तानी आतंकी लखबीर सिंह रोडे की मौत हो गई है.

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पाकिस्तान में छिप कर बैठे खालिस्तानी आतंकी लखबीर सिंह रोडे की मौत की खबर सामने आ रही है. इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने खबर प्रकाशित की है जिसके अनुसार प्रतिबंधित संगठनों में सं एक खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के स्वयंभू प्रमुख लखबीर सिंह रोडे की मौत हो गई है जो वह 72 वर्ष के थे. वह खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के भतीजे थे. आतंकी लखबीर सिंह रोडे की बात करें तो उसे यूए (पी) ए के तहत एक ‘आतंकवादी’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया था जिसके बाद वह पाकिस्तान भाग गया था. लखबीर सिंह के भाई और पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की.

पाकिस्तान में किया गया अंतिम संस्कार

जसबीर सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मुझे मेरे भाई लखबीर सिंह रोडे के बेटे ने खबर दी कि पाकिस्तान में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. उनका अंतिम संस्कार वहीं कर दिया गया है. वह शुगर पेशेंट थे. उनके दो बेटे, एक बेटी और पत्नी कनाडा में रहते हैं. लखबीर सिंह का नेटिव विलेज मोगा था वह शुरू में दुबई भाग गया था. बाद में उसने पाकिस्तान में शरण ले ली थी. उसने अपने परिवार को कनाडा में ही रखा था. 2002 में भारत ने पाकिस्तान से 20 आतंकवादियों की सूची सौंपकर उनके प्रत्यर्पण की मांग की थी.

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क्यों इतना खतरनाक था आतंकी लखबीर सिंह

लखबीर सिंह को लेकर केंद्र सरकार के पास जो दस्तावेज मौजूद हैं उसके अनुसार, ISYF ने यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में विभिन्न स्थानों पर सक्रिय था. लखबीर सिंह कथित तौर पर पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का काम करता है. यही नहीं वह कई वीवीआईपी और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने के लिए सीमा पार से हथियारों और विस्फोटकों की खेप भारत भेजने का काम करता रहा है.

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इस साल की शुरुआत में एनआईए ने मोगा के गांव कोठे गुरुपुरा में लखबीर सिंह की जमीन का एक टुकड़ा जब्त कर लिया था.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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