मटन की किल्लत से कश्मीरी शादियों का रंग हुआ फीका, व्यापारियों ने पंजाब पर फोड़ा ठीकरा
कश्मीरी शादी में भोजन के लिए बैठे मेहमान, फोटो AI
Kashmir Wedding: कश्मीर घाटी में इन दिनों शादियों का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन पारंपरिक दावतों की रौनक पूरी तरह गायब है. स्थिति यह है कि मटन की भारी किल्लत के कारण कई परिवार अपने बच्चों की शादियां तक टालने पर मजबूर हो रहे हैं. घाटी के व्यापारियों का आरोप है कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य से होकर गुजरने वाले पशुओं पर लगाए गए ‘गैर-कानूनी’ कर की वजह से यह संकट पैदा हुआ है.
Kashmir Wedding: कश्मीर में शादियां पारंपरिक वाजवान के बिना अधूरी मानी जाती हैं. वाजवान कश्मीर का पारंपरिक और शाही भोजन जिसमें 15 से 36 तरह के मांस-आधारित व्यंजन होते हैं. यह हर शादी में मेहमाननवाजी का मुख्य आकर्षण होता है.
कश्मीरी शादी में लगभग 500 किलोग्राम मटन और 150 किलोग्राम चिकन की होती है खपत
पीटीआई की खबर के अनुसार एक औसत कश्मीरी शादी में लगभग 500 किलोग्राम मटन और 150 किलोग्राम चिकन की खपत होती है, जबकि भव्य शादियों में एक टन से भी ज्यादा मटन का इस्तेमाल होता है. व्यापारियों का कहना है कि कथित टैक्स के कारण आपूर्ति ठप होने से शादी-ब्याह का उत्साह फीका पड़ गया है.
व्यापारियों ने लगाया ‘गुंडा टैक्स’ का आरोप
बडगाम के मटन कारोबारी अल्ताफ गनई ने बताया, “पंजाब में पैदा हुई दिक्कतों के कारण हमें भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. मैंने राजस्थान में आपूर्तिकर्ता को अग्रिम भुगतान कर दिया है, लेकिन पिछले एक महीने में मुझे कोई भेड़ नहीं मिली है. अगर अगले 15 दिनों में यह गतिरोध दूर नहीं हुआ, तो हमें लाखों रुपये का नुकसान होगा और गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा.” ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष खाजिर मोहम्मद रेगू ने पंजाब सरकार द्वारा लगाए गए चार प्रतिशत कर की तुलना ‘‘गुंडा टैक्स’’ से की है. उन्होंने कहा कि जब पशु राजस्थान या दिल्ली से खरीदे जाते हैं, तो पंजाब सरकार द्वारा बीच रास्ते में कोई भी कर लगाना पूरी तरह से अवैध और अनुचित है.
शादी टालने की नौबत, आम लोग परेशान
मटन की कमी ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं. हैदरपोरा के रहने वाले अब्दुल मजीद भट ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “मेरे बेटे की शादी 25 जुलाई को होनी तय है. लेकिन मटन की भारी कमी को देखते हुए मैं तय नहीं कर पा रहा हूं कि शादी की दावत का आयोजन कैसे करूं. अब हमारे पास शादी टालने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है.”
सीएम उमर अब्दुल्ला ने की पंजाब के मुख्यमंत्री से बात
मामले के तूल पकड़ने पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को हस्तक्षेप किया. उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने मटन कारोबारियों की चिंताएं रखी हैं और पड़ोसी राज्य से पशुओं को ले जाने वाले वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उनसे दखल देने का आग्रह किया है. अब्दुल्ला ने मान को सूचित किया कि वैध परमिट और सभी जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद, जम्मू-कश्मीर जाने वाले वाहनों को पंजाब में ठेकेदारों के कुछ समूहों द्वारा कथित रूप से रोका जा रहा है और उनसे अनधिकृत तौर पर शुल्क वसूला जा रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब सरकार इस पर जल्द सख्त कदम उठाएगी.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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