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JNU: जेएनयू में आपत्तिजनक नारे को लेकर पुलिस में दर्ज हुई शिकायत

जेएनयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोमवार की देर रात आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है.

JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर विवादित नारे के कारण सुर्खियों में है. जेएनयू में पांच दिसंबर 2020 में हुई हिंसा को लेकर सोमवार देर रात एक कार्यक्रम का आयोजन वामपंथी छात्र संगठन से जुड़े छात्रों की ओर से  किया गया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाए गए. मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है. 

पुलिस को लिखे पत्र में जेएनयू प्रशासन ने लिखा है जेएनयूएसयू द्वारा ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा’ नामक एक कार्यक्रम सोमवार को आयोजित किया गया था. शुरू में यह आयोजन सीमित लग रही थी, जिसमें लगभग 30 से 35 छात्र मौजूद थे. लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद इस सभा में ‘भड़काऊ और आपत्तिजनक’ नारे लगाने का मामला सामने आया है. वहीं विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि ऐसा कृत्य संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का अनादर है. 

जेएनयू प्रशासन ने सबारमती परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन के प्रसारित हो रहे वीडियो को लेकर संज्ञान लिया है और सुरक्षा शाखा को जांच में पुलिस का सहयोग करने के लिए कहा गया है. ऐसा करना जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन है और ऐसे नारों में सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर सद्भाव, विश्वविद्यालय और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है. 

जेएनयू के वामपंथी-टुकड़े-टुकड़े गैंग का देशविरोधी चेहरा फिर हुआ उजागर


सोमवार को जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर देशविरोधी मानसिकता सामने आयी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्र विरोधी तथा हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद कुछ वामपंथी और तथाकथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम भड़काऊ नारेबाजी की. 


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बयान जारी कर कहा कि जेएनयू में न केवल संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने वाले नारे लगाए गए बल्कि  प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, आरएसएस और अभाविप के खिलाफ भी उकसाने वाले अमर्यादित नारे दिए गए. यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं है, बल्कि लगातार जेएनयू से ऐसी घटना सामने आती रहती है. ऐसा कृत्य करने वाले उस विचारधारा से है, जो पहले भी आतंकवादियों के समर्थन, भारत की एकता-अखंडता पर हमले और संवैधानिक व्यवस्था को बदनाम करने का काम करते रहे हैं. 


अभाविप ने कहा है कि जेएनयू में बार-बार वामपंथी और टुकड़े-टुकड़े गैंग द्वारा देश की एकता-अखंडता पर सवाल उठाना, आतंकवाद के आरोपियों का महिमामंडन करने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की जो परंपरा बनाई गई है, उसका अब खुलकर विरोध किया जाना जरूरी है. जेएनयू प्रशासन का लापरवाह रवैया भी सवालों के घेरे में हैं. एबीवीपी की मांग है कि जेएनयू परिसर में किसी भी कीमत पर हिंसा, घृणा और भारत-विरोधी एजेंडे को पनपने नहीं देना चाहिए और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.  

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