Nepal Violence : क्या नेपाल हिंसा में है चीन का हाथ? जानें क्या कहते हैं जानकार

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Sep 2025 7:04 AM

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नेपाल में जारी हिंसा की तस्वीर (Photo : PTI)

Nepal Violence : नेपाल में हिंसा का दौर जारी है जिसपर पीएम मोदी ने चिंता जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मैसेज जारी कर नेपाल की जनता से शांति बनाए रखने की अपील की. नेपाल हिंसा पर जानकारों ने भी चिंता जताई है. जानें जानकारों ने भारत को लेकर क्या कहा?

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Nepal Violence : पड़ोस में मची उथल-पुथल के मद्देनजर भारत को स्थिति पर सावधानीपूर्वक नजर रखने की जरूरत है. यह बात कई पूर्व राजनयिकों ने कही है. नेपाल में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है. इसके बाद भारत के कई पूर्व राजनयिकों ने कहा कि भारत को इस उभरती स्थिति पर “बहुत बारीकी से” नजर रखनी चाहिए. कुछ राजयनिकों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पड़ोस में उथल-पुथल मची है, जो एक ठीक संकेत नहीं है.

हमें घरेलू प्रक्रिया को चलने देना चाहिए: अशोक कांत

साल 1997 से 2000 तक काठमांडू में भारतीय मिशन के उप-प्रमुख रहे अशोक कांत ने फिलहाल ‘प्रतीक्षा करने और नजर बनाए रखने’ की नीति अपनाने का आह्वान किया है. उन्होंने कहा, “मेरा अपना अनुभव यही रहा है कि हमें घरेलू प्रक्रिया को चलने देना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि इस समय हमारी कोई भूमिका हो सकती है. हमारा हस्तक्षेप उल्टा असर डालेगा. इसलिए हमें पहले स्थिति को देखना और उसका आकलन करना होगा.” हालांकि, उन्होंने कहा कि नेपाल में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.

क्या नेपाल हिंसा में है चीन का हाथ?

इस बात पर कि नेपाल में उथल-पुथल ऐसे समय में हो रही है जब भारत-चीन संबंध सुधर रहे हैं, कांत ने कहा, “मुझे लगता है कि हमें इन सब बातों को चीन के साथ अपने संबंधों की नजर से नहीं देखना चाहिए.” वरिष्ठ राजनयिक वेणु राजामणि ने भी उनके विचारों से सहमति जताते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि चीन यहां कोई कारक है.” उन्होंने कहा कि श्रीलंका की जहां तक बात है तो वहां 2022 के विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिरता है, और बांग्लादेश चुनाव की ओर बढ़ रहा है.

नेपाल में जो कुछ हो रहा है वह चिंताजनक : वरिष्ठ राजनयिक वेणु राजामणि

वरिष्ठ राजनयिक वेणु राजामणि ने कहा कि नेपाल में जो कुछ हो रहा है वह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि चिंताजनक भी है. उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई घटनाओं के बाद यह हुआ है. पड़ोसी देशों में अस्थिरता की कई घटनाएं हुईं, जिसके कारण शासन व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं और नेता भाग गए. यह स्पष्ट रूप से ठीक संकेत नहीं है.’’ साल 2017 से 2020 तक नीदरलैंड में भारत के राजदूत रहे राजमणि और विभिन्न अन्य राजनयिकों ने सुझाव दिया कि भारत को नेपाल में घरेलू हालात को समझना चाहिए और स्थिति पर सावधानीपूर्वक नजर रखनी चाहिए.

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राजामणि ने कहा, “मुझे लगता है कि हमें चीजों के सुलझने तक इंतजार करना होगा…(लेकिन) हमें इस पर बहुत सावधानी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसका हम पर और नेपाल में हमारे हितों पर बहुत प्रभाव पड़ेगा.”

ओली के निजी आवास में आग लगाई गई

राजयनिकों ने हाल के वर्षों में श्रीलंका और बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया, जिनके कारण राजनीतिक उथल-पुथल हुई और सरकारें गिर गईं. नेपाल इस समय गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. काठमांडू में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया. प्रदर्शनकारियों ने बालकोट में ओली के निजी आवास में आग लगा दी तथा विभिन्न पूर्व मंत्रियों के आवासों पर हमला किया. नेपाल में सोशल मीडिया पर सरकारी प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं ने सोमवार हिंसक विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस के बल प्रयोग करने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक अन्य घायल हो गए.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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