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ट्रेन में चढ़े भारतीय छात्र-छात्राओं को यूक्रेनियों ने ट्रेन से उतारा, छात्र ने सुनाई आपबीती

Updated at : 04 Mar 2022 1:10 PM (IST)
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ट्रेन में चढ़े भारतीय छात्र-छात्राओं को यूक्रेनियों ने ट्रेन से उतारा, छात्र ने सुनाई आपबीती

Berlin: Helpers provide Ukrainian refugees with clothing at the main train station in Berlin, Germany, Thursday, March 3, 2022. The fighting from Russia's invasion has sent more than 1 million people fleeing Ukraine, according to the U.N., which fears those refugee numbers could skyrocket. AP/PTI(AP03_04_2022_000003A)

Russia Ukraine War : ट्रेन से नीचे उतारने के कुछ ही समय बाद रूसी सैनिकों ने उनको वहां से तुरंत कहीं दूसरी जगह जाने के लिए कहा. ऐसी स्थिति में अनन्य ने सभी छात्र-छात्राओं को 12 किलोमीटर तक पैदल ले जाकर ग्रामीण इलाके में शरण दिलवाई.

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हमीरपुर (हिमाचल) : जिले की ग्राम पंचायत सासन के गांव घिरथेड़ी के अनन्य शर्मा ने यूक्रेन में अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के सैकड़ों छात्र छात्राओं को पैदल ले जाकर ग्रामीण क्षेत्र में शरण दिलाई है. अनन्य दिसंबर 2021 से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. अचानक वहां पर युद्ध होने पर उनकी पढ़ाई ही प्रभावित नहीं हुई बल्कि जान भी जोखिम में है. पिता संजीव शर्मा ने बताया कि अनन्य ने बुधवार रात को एक वीडियो संदेश के माध्यम से आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्होंने जैसे ही दो दिन पहले खारकीव रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में चढऩे का प्रयास किया तो यूक्रेन निवासियों ने सभी स्वदेश लौट रहे करीब दो हजार भारतीय छात्र छात्राओं को ट्रेनों से नीचे उतार दिया.

रूसी सैनिकों ने तुरंत कहीं दूसरी जगह जाने के लिए कहा

ट्रेन से नीचे उतारने के कुछ ही समय बाद रूसी सैनिकों ने उनको वहां से तुरंत कहीं दूसरी जगह जाने के लिए कहा. ऐसी स्थिति में अनन्य ने सभी छात्र-छात्राओं को 12 किलोमीटर तक पैदल ले जाकर ग्रामीण इलाके में शरण दिलवाई. उन्होंने प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार से सभी भारतीय मूल के बच्चों को अति शीघ्र सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए प्रयास और भी ज्यादा तेज करने की गुहार लगाई है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जहां सभी छात्र छात्राओं ने शरण ले रखी है वहां से रोमानिया तथा पोलैंड बॉर्डर करीब 1300 किलोमीटर की दूरी पर हैं. इसलिए बमबारी और गोलियों के बीच से निकल कर स्वदेश पहुंचना संभव नहीं लग रहा.

पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं भूखे प्यासे

ऐसी स्थिति में यदि केंद्र सरकार मास्को वाले रास्ते से छात्र छात्राओं को स्वदेश लाने का प्रयास करे तब वहां से मात्र ढाई तीन घंटे में भारत में पहुंचा जा सकता है. इसलिए केंद्र व प्रदेश की सरकारों को भी अतिशीघ्र बच्चों को रेस्क्यू करने की योजना पर विचार करना चाहिए. अन्यथा पिछले कई दिनों से यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं भूखे प्यासे हैं. अपनी जान को बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं. अनन्य ने बताया कि अब तो छात्र शारीरिक तौर पर इतने निर्बल हो चुके हैं कि उनमें पैदल चलने की हिम्मत भी नहीं रही है.

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