डेढ़ महीने बाद रेलवे ने फिर भरी सांस, जानें कैसा रहा है सफर

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 May 2020 5:26 PM

विज्ञापन

Indian Railways : भारत में रेलवे का इतिहास 167 साल पुराना है. भारत में ब्रिटिश काल में पहली ट्रेन चली थी तब से लेकर आज तक कभी ऐसा मौका नहीं आया था जब रेल सेवा को इस तरह से डेढ़ महीने से ज्यादा समय के लिए बंद कर दिया गया हो. कोरोना वायरस के इस दौर में जब पूरा विश्व घरों में दुबका है, भारत सरकार ने भी इस वायरस के संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए 22 मार्च को यह घोषणा की थी कि भारत में रेल सेवा बंद की जा रही है. पहली दफा रेल सेवा को 31 मार्च तक के लिए बंद किया गया था, लेकिन लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के साथ-साथ रेल सेवा भी प्रभावित हुई और 11 मई तक रेल सेवा बंद रही.

विज्ञापन

भारत में रेलवे का इतिहास 167 साल पुराना है. भारत में ब्रिटिश काल में पहली ट्रेन चली थी तब से लेकर आज तक कभी ऐसा मौका नहीं आया था जब रेल सेवा को इस तरह से डेढ़ महीने से ज्यादा समय के लिए बंद कर दिया गया हो. कोरोना वायरस के इस दौर में जब पूरा विश्व घरों में दुबका है, भारत सरकार ने भी इस वायरस के संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए 22 मार्च को यह घोषणा की थी कि भारत में रेल सेवा बंद की जा रही है. पहली दफा रेल सेवा को 31 मार्च तक के लिए बंद किया गया था, लेकिन लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के साथ-साथ रेल सेवा भी प्रभावित हुई और 11 मई तक रेल सेवा बंद रही.

भारतीय रेल की तरफ से 10 मई को यह घोषणा की गयी कि 12 मई से देश में रेल सेवा पुनर्बहाल की जायेगी जिसके लिए 11 मई से टिकटों की अॅानलाइन बुकिंग हुई. रेलवे पूरे देश को जोड़ता है और एक तरह से आवागमन के साधनों की लाइफलाइन भी है. यही कारण है कि इसके थमते ही पूरा देश थम गया था. आखिर रेलवे में ऐसी क्या बात है कि यह पूरे देश की लाइफलाइन है? अगर आप यह सवाल करते हैं, तो आपको यह जानना पड़ेगा कि रेलवे के जरिये एक दिन में 2.3 करोड़ यात्री हर दिन एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. वहीं 13 हजार ट्रेन रोज चलती है, जो लोगों को आपस में जोड़ती है. यह बात सिर्फ यात्री ट्रेनों के लिए कही जा रही है, जबकि रेलवे के जरिये ही देश में सबसे ज्यादा माल ढुलाई का काम भी होता है.

वर्ष 2018 में भारतीय रेलवे ने 1.16 बिलियन टन सामानों की ढुलाई की. भारतीय रेल में कर्मचारियों की संख्या 12 से 14 लाख के बीच है. इन आंकड़ों से रेलवे कितना बड़ा है इसकी जानकारी हमें मिल जाती है. यही कारण रहा कि सरकार ने यह माना कि रेलें अगर चलती रहीं तो कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से होगा. ‘जान है तो जहान है’ को आधार मानकर सरकार ने भारी नुकसान सहते हुए भी रेलवे का परिचालन बंद कर दिया. अब जबकि रेलवे ने एक बार फिर सांस भरी है, कुछ पुरानी बातें याद आती हैं.

भारत में रेलवे का इतिहास : भारत में पहली पैसेंजर ट्रेन 16 अप्रैल 1853 में चली थी. यह ट्रेन बंबई से थाणे के लिए चली थी जिसने 34 किलीमीटर की यात्रा तय की थी. यह ट्रेन तीन स्टीम इंजन के जरिये चली थी और इसमें कुल 14 कैरेज थे जिसपर कुल 400 यात्री सवार थे. इन तीनों इंजन को नाम दिया गया था साहिब, सिंध और सुल्तान. हालांकि देश में पहली ट्रेन मालगाड़ी के रूप में चली थी जिसका परिचालन 1837 में माल ढुलाई के लिए चली थी.

1974 में हुई रेलवे की हड़ताल ने सबको परेशान कर दिया था : कोरोना वायरस के कारण रेल सेवा डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से बंद है, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है. यह घटना रेलवे के उस हड़ताल की याद दिलाती है, जिसके होने से तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा घबरा गये थे और उसे अर्थव्यवस्था को चकनाचूर करने वाला बताया था. वह हड़ताल आठ से 27 मई तक हुई थी. इस हड़ताल के प्रणेता थे भारत के दिग्गज राजनेता जॉर्ज फर्नांडिस. उस वक्त जॉर्ज अॅाल इंडिया रेलवे मेंस फेडेरेशन के अध्यक्ष थे. यह हड़ताल लोकोमोटिव स्टॉफ के काम के घंटे को निर्धारित करने और वेतन में बढ़ोत्तरी के लिए हुई थी. फेडेरेशन ने काम के घंटे को आठ करने की मांग की थी और लंबित वेतन आयोग की सिफारिश को लागू करने को कहा था. यह हड़ताल इतनी जबरदस्त थी कि देश थम सा गया था. विभाग के 70 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर थे और सेना और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया था. इस वक्त जॉर्ज ने नारा दिया था रेल से बेहतर जेल.

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola