'CAA से भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं', विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने जारी किया बयान
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 18 Mar 2024 3:36 PM
मोदी-शाह के युग में मुसलमानों पर बदली भाजपा की रणनीति. फाइल फोटो.
CAA: देशभर में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू होने से एक ओर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आये गैर मुस्लिम शरणार्थियों में खुशी की लहर देखी जा रही है, तो दिल्ली के शाहीन बाग के निवासियों ने अप्रसन्नता जताते हुए इसके मुस्लिमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही. मुसलमानों में व्याप्त डर और अशंका का दूर करते हुए गृह मंत्रालय ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि इससे भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं.
CAA: गृह मंत्रालय ने सीएए लागू होने के दूसरे दिन कहा, भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि उनकी नागरिकता को प्रभावित करने वाला कोई भी प्रावधान सीएए में नहीं है. मंत्रालय ने कहा, सीएए का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं, उनके पास हिंदू समुदाय के लोगों के समान अधिकार हैं. केंद्र सरकार ने कहा, नागरिकता साबित करने के लिए किसी भी भारतीय नागरिक को कोई दस्तावेज पेश करने के लिये नहीं कहा जाएगा.
केंद्र सरकार बोली- सीएए अवैध प्रवासियों को वापस भेजने से संबंधित नहीं
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साफ कर दिया कि सीएए अवैध प्रवासियों को वापस भेजने से संबंधित नहीं है. इसके मुसलमानों के विरूद्ध होने संबंधी एक वर्ग के लोगों की चिंता अनुचित है.
आवेदन की योग्यता अवधि को 11 से कम कर पांच साल कर दिया गया
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, उन तीन मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के कारण पूरी दुनिया में इस्लाम की छवि बुरी तरह खराब हुई है. हालांकि, इस्लाम एक शांतिपूर्ण धर्म होने के नाते, कभी भी धार्मिक आधार पर घृणा, हिंसा, उत्पीड़न को बढ़ावा नहीं देता है. यह कानून अत्याचार के नाम पर इस्लाम की छवि खराब होने से बचाता है. कानून की आवश्यकता बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि भारत का अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ प्रवासियों को इन देशों में वापस भेजने के लिए कोई समझौता नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6, जो प्राकृतिक आधार पर नागरिकता से संबंधित है, के तहत दुनिया में कहीं से भी मुसलमानों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने पर कोई रोक नहीं है. सीएए ने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आने वाले लोगों के उत्पीड़न की पीड़ा को कम करने तथा उनके प्रति उदार व्यवहार दिखाने के उद्देश्य से नागरिकता के लिए आवेदन की योग्यता अवधि को 11 से कम कर पांच साल कर दिया है.
सीएए लागू होने से शाहीन बाग के निवासी नाखुश
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियमों को अधिसूचित किये जाने के एक दिन बाद दिल्ली के शाहीन बाग के निवासियों ने अप्रसन्नता जताते हुए इसके मुस्लिमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही.शाहीन बाग के स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम से मुस्लिम जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
31 दिसंबर 2014 तक भारत में आये गैर मुस्लिम शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता
संसद ने 2019 में सीएए कानून बनाया था जिसका उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उन बिना दस्तावेज वाले गैर मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करने में तेजी लाना है जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आ गये थे. नियमों को अधिसूचित किये जाने से इन देशों के प्रताड़ित गैर मुस्लिम प्रवासी– हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी एवं ईसाई अब भारतीय नागरिकता के लिए पात्र हो गये हैं.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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