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भारत-जापान संबंध और बौद्ध धर्म का प्रभाव

Updated at : 05 Sep 2023 11:27 AM (IST)
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भारत-जापान संबंध और बौद्ध धर्म का प्रभाव

वर्ष 2021 में भारत जापान का 18वां सबसे बड़ा और जापान भारत का 13वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. व्यापारिक भागीदारी के साथ ही, भारत में जापान के प्रत्यक्ष निवेश में भी वृद्धि हुई है

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ऐसा कहा जाता है कि जापान-भारत के बीच आदान-प्रदान छठी शताब्दी में शुरू हुआ, जब बौद्ध धर्म से जापान का परिचय हुआ. बौद्ध धर्म से छनकर निकली भारतीय संस्कृति का जापानी संस्कृति पर बहुत प्रभाव पड़ा. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में, जब जवाहरलाल नेहरू ने टोक्यो के यूनो चिड़ियाघर को एक भारतीय हाथी दान में दिया, तो युद्ध में हार की हताशा से उबरने में जापानी लोगों को थोड़ी सहायता मिली. जापान और भारत ने 28 अप्रैल, 1952 को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया. इस प्रकार, दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए.

व्यापारिक संबंध

हाल के वर्षों में, जापान और भारत के बीच आर्थिक संबंधों का लगातार विस्तार हुआ है. दोनों देशों के बीच व्यापार भी बढ़ा है. वर्ष 2021 में भारत जापान का 18वां सबसे बड़ा और जापान भारत का 13वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. व्यापारिक भागीदारी के साथ ही, भारत में जापान के प्रत्यक्ष निवेश में भी वृद्धि हुई है, और वित्त वर्ष 2021 में जापान भारत का 5वां सबसे बड़ा निवेशक रहा. भारत में जापानी निजी क्षेत्र की रुचि भी बढ़ रही है. वर्ष 2021 की बात करें, तो इस वर्ष लगभग 1,439 जापानी कंपनियों की शाखाएं भारत में काम कर रही थीं.

भारत-रूस में बढ़ रहा द्विपक्षीय निवेश

रूस और भारत के बीच व्यापार, आर्थिक व निवेश सहयोग का विकास दोनों देशों की प्राथमिकताओं में बना हुआ है. इन क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों देशों को उम्मीद है कि 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर और द्विपक्षीय निवेश 50 अरब डॉलर तक पहुंच जायेगा. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें, तो ऐसा होता प्रतीत भी हो रहा है.

13.2 अरब डॉलर रहा दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा वित्त वर्ष 2021-22 में.

3.26 अरब डॉलर का निर्यात भारत द्वारा रूस को किया गया इस अवधि में, जबकि आयात का आंकड़ा 9.86 अरब डॉलर के साथ कहीं अधिक रहा.

18.23 अरब डॉलर के साथ द्विपक्षीय व्यापार अप्रैल से अगस्त 2022 की अवधि में सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.

17.23 अरब डॉलर का इस अवधि में भारत ने आयात किया रूस से, जबकि निर्यात का मूल्य 992.73 मिलियन डॉलर रहा.

15 अरब डॉलर का (अनुमानित) निवेश किया भारत ने रूस में, जबकि 18 अरब डॉलर का निवेश रूस ने किया भारत में, 2022 में, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार.

भारत का दीर्घकालिक भागीदार रहा है रूस

भारत के साथ रूस के राजनयिक संबंध 13 अप्रैल, 1947 को स्थापित किये गये. वर्ष 1991 के बाद, समझौते के आधार पर दोनों देशों के राजनयिक संबंधों का नवीनीकरण हुआ. भारत और रूसी संघ के बीच 28 जनवरी, 1993 को मित्रता और सहयोग पर समझौता हुआ, जो दोनों देशों के संबंधों का आधार है. रूस भारत का दीर्घकालिक भागीदार रहा है. भारत-रूस संबंधों का विकास भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ रहा है. अक्तूबर 2000 में ‘भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर घोषणा’ पर हस्ताक्षर के बाद से, भारत-रूस संबंधों ने राजनीतिक सहित लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है.

भारत-अमेरिका रिश्तों में गर्मजोशी

भारत के स्वतंत्र होने के बाद से, अमेरिका के साथ उसके संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं. पर हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में गर्मजोशी आयी है और आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्रों में सहयोग मजबूत हुए हैं. वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक संबंध कायम हैं.

व्यापार व आर्थिक मामले

उत्पादों के व्यापार (मर्केंडाइज ट्रेड) के मामले में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है. दोनों देशों के बीच 67.41 अरब डॉलर के द्विपक्षीय उत्पाद व्यापार के साथ यह भारत के कुल उत्पाद व्यापार का 11.98 प्रतिशत हिस्सा है.

यूएस सेंसस डेटा के अनुसार, 2021 (जनवरी-दिसंबर) में दोनों देशों के बीच उत्पाद व्यापार 113 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

वर्ष 2017 में अमेरिका के साथ शुरू हुआ हाइड्रोकार्बन का द्विपक्षीय व्यापार 2021-2022 में 19 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

अमेरिका हमारा कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा और एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

वित्त वर्ष 2020-21 में भारत को 81.72 अरब डॉलर की अब तक की सबसे अधिक एफडीआई प्राप्त हुई, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार. इसी वर्ष 13.82 अरब डॉलर के प्रवाह के साथ अमेरिका हमारा दूसरा सबसे बड़ा एफडीआई स्रोत बन गया.

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