दुर्गम पहाड़ों पर भी दुश्मनों पर रहेगी पैनी नजर, वायुसेना को मिलेगा हाईटेक माउंटेन रडार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
Mountain Radar: भारतीय वायुसेना अब दुर्गम पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाकों में भी दुश्मनों की हवाई गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकेगी. स्वदेशी माउंटेन रडार अत्याधुनिक तकनीक से सटीक निगरानी करेगा.
Mountain Radar: पहाड़ी और कठिन सीमावर्ती इलाकों में भी अब दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर वायुसेना की पैनी नजर रहेगी. कोई भी दुश्मन का विमान या ड्रोन अब स्वदेशी माउंटेन रडार से नहीं छिप पाएगा. भारतीय वायुसेना के लिए करीब 1950 करोड़ रुपए की लागत से स्वदेशी माउंटेन रडार तैयार कर रहा है. ये अत्याधुनिक रडार दुर्गम क्षेत्रों में भी सटीकता के साथ काम करने में सक्षम रहेंगे. रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इन रडार की तैनाती से देश की एयर डिफेंस और मजबूत होगी. दुश्मन की किसी भी हरकत का समय रहते पता लगाना काफी आसान होगा.
पहाड़ी क्षेत्रों और रेगिस्तानी इलाकों में मजबूत होगी निगरानी
उत्तर और पूर्व दिशा में भारत की सीमा हिमालय पर्वत श्रृंखला से घिरी हुई है. यह चीन, नेपाल और भूटान से लगती है. भारत की पूर्वी सीमा बांग्लादेश और म्यांमार से सटी हुई है, जो पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है. इन क्षेत्रों की सीमाएं दुर्गम पर्वतीय इलाकों में होने के कारण माउंटेन रडार काफी उपयोगी साबित हो सकता है. इसके अलावा भारत की पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी इलाकों में भी यह रडार अच्छे से काम कर सकता है. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि माउंटेन रडार को बनाने की पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई है.
रक्षा मंत्रालय ने किया 1,950 करोड़ रुपए का समझौता
रक्षा मंत्रालय और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच भारतीय वायुसेना के लिए दो माउंटेन रडार खरीदने को लेकर करीब 1950 करोड़ रुपए का समझौता हुआ है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह सौदा भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित श्रेणी के तहत किया गया है. इन रडार सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रडार विकास स्थापना की ओर से विकसित किया गया है. इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड करेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रक्षा क्षेत्र में देश की विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी.
भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंचा
भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 62 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए कहा कि रक्षा निर्यात में यह बड़ी छलांग भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है. उन्होंने बताया कि देश रक्षा निर्यात में सफलता की शानदार कहानी लिख रहा है।
रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के नये हाई लेवल तक पर पहुंच गया है. यह बीते वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है. रक्षा मंत्री ने कहा कि 14,802 करोड़ रुपये की इस बड़ी वृद्धि से भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत क्षमता पर दुनिया का विश्वास झलकता है. उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी उद्योग का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा. भारत का रक्षा निर्यात 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये और 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये रहा था.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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