India china news: चीन की दगाबाजी का करारा जवाब देने की तैयारी में मोदी सरकार, ड्रैगन के हौसले होंगे पस्त

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 Aug 2020 8:01 AM

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India china news, india china border: भारत-चीन के बीच लद्दाख एलएसी पर तनाव कम नहीं हो रहा. डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया पर पर हामी भरने के बाद भी. चीन अपनी स्थिति से टस से मस होने को तैयार नहीं है. चीन की इस दगाबाजी से मोदी सरकार नाराज है और जल्द ही कुछ बड़े कदम का ऐलान किया जा सकता है.

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India china news, india china border: भारत-चीन के बीच लद्दाख एलएसी पर तनाव कम नहीं हो रहा. डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया पर पर हामी भरने के बाद भी. चीन अपनी स्थिति से टस से मस होने को तैयार नहीं है. चीन की इस दगाबाजी से मोदी सरकार नाराज है और जल्द ही कुछ बड़े कदम का ऐलान किया जा सकता है. बता दें कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पहले फिंगर-4 से पीछे हटी, लेकिन फिंगर-5 पर जाकर बैठ गई.

पीएलए पैंगोंग त्सो और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र पर अब भी फॉरवर्ड पोजिशन पर काबिज है. वार्ताओं में हालांकि चीन पीछे हटने पर सहमति व्यक्त करता रहा है, लेकिन इसका जमीन पर उसे क्रियान्वयन नहीं करता. ऐसी स्थिति में चीन की हेकड़ी तोड़ने के लिए केंद्र की मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका देने योजना बना रही है. भारत का अर्थ व्यापार है, यह संदेश देने के लिए मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर चीन के साथ आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है. भारत-चीन के बीच लद्दाख एलएसी पर तनाव से जुड़ी हर Hindi News से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.

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एचटी के मुताबिक, शीर्ष चीन अध्ययन समूह (सीएसजी) ने सोमवार को लद्दाख में जमीन पर चीनी सेना के एक्शन और तिब्बत के कब्जे वाले अक्साई चीन क्षेत्र में उसकी सैन्य मुद्रा पर चर्चा की. बता दें कि सीएसजी वह समूह है, जो चीन के साथ एक्शन पर देश की क्या रणनीति होगी, इसकी सिफारिश करता है. इसमें भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित सैन्य और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

तनाव और व्यापार एक साथ नहीं

जुलाई को सीमा वार्ता पर भारतीय विशेष प्रतिनिधि ने दो घंटे से अधिक समय तक अपने चीनी समकक्ष से बात की. तब तय हुआ था कि दोनों पक्ष पूरी तरह से अलग हो जाएंगे और फिर डी-एस्केलेट हो जाएंगे, मगर एक महीने बाद स्थिति चीन के साथ एक कूटनीतिक पेशकश के साथ एक गतिरोध पर पहुंच गई है. भारत को आपत्ति इसी बात से है कि जब तक चीनी सेना पीछे नहीं हटती, तब तक शांति की बात करना भी बेमानी ही है. मोदी सरकार स्पष्ट है कि द्विपक्षीय संबंध सीमा शांति के साथ सीधे जुड़े हुए हैं और अतीत की तरह उन्हें समानांतर ट्रैक पर नहीं आने देंगे।

अमेरिका की तरह एक्शन लेगा भारत

जिस तरह अमेरिका ने हुवई और इसकी सहयोगी कंपनी पर जासूसी के लिए एक्शन लेकर चीन को झटका दिया ठीक उसी तरह भारत भी जल्द ही बड़ा एक्शन ले सकता है. यह तो पहले से ही साफ है कि भारत चीनी संचार और बिजली कंपनियों को भविष्य की किसी भी परियोजना से बाहर रखेगा.

Posted By: Utpal kant

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