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Weather Alert: इस साल और सताएगी गर्मी, सर्वाधिक गर्म वर्षों में से एक रहेगा 2021, देश के इन राज्यों में रहेगा सबसे अधिक असर

By Prabhat Khabar Print Desk
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इस साल और सताएगी गर्मी
इस साल और सताएगी गर्मी
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Weather Alert: इस साल गर्मी के मौसम में उत्तर, पूर्वोत्तर, कुछ पूर्वी हिस्सों और पश्चिमी भारत के कुछ भागों में पारे का मिजाज थोड़ा ऊपर रहने का अनुमान है. मौसम विभाग की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बीते वर्ष की तुलना में इस बार देश के कुछ हिस्सों में गर्मी अधिक परेशान करेगी. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) द्वारा बीते दिनों जारी मार्च से मई के मौसम पूर्वानुमान में कहा गया है कि मध्य भारत के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से तथा उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के कुछ तटीय इलाकों में गर्मी इस बार सामान्य से अधिक रहेगी.

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़, ओड़िशा, गुजरात और तटीय महाराष्ट्र के अधिकतम तापमान में मामूली बढ़त दर्ज की जायेगी. आइएमडी का कहना है कि गंगा के मैदानी भू-भाग, पंजाब, हरियाणा, चंड़ीगढ़, दिल्ली, पूर्वी व पश्चिमी यूपी, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओड़िशा में मार्च से मई की अवधि के दौरान तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है.

अमेरिका के जंगलों में लगी भयावह आग से लेकर साइबेरिया की भीषण गर्मी तक, बीते वर्ष जलवायु परिवर्तन का प्रभाव दुनियाभर में महसूस किया गया. वर्ष 2020 दशक का सर्वाधिक गर्म वर्ष रहा है़ उन्नीसवीं सदी की तुलना में बीता वर्ष 1़ 2 डिग्री सेंटीग्रेड ज्यादा गर्म दर्ज किया गया़ इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्तमान वर्ष भी दुनिया को गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है़

छत्तीसगढ़ और ओड़िशा में होगी गर्मी की अधिकता

इस बात की संभावना है कि 75 प्रतिशत सामान्य से ज्यादा तापमान दो राज्यों छत्तीसगढ़ और ओड़िशा में दर्ज होगा. इन दोनों राज्यों में सामान्य से ज्यादा तापमान क्रमश: 0.86 डिग्री सेल्सियस और 0.66 डिग्री सेल्सियस रहेगा. इसके अलावा 60 प्रतिशत संभावना है कि हरियाणा, चंड़ीगढ़ और दिल्ली के तापमान में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों के तापमान बढ़ोतरी में मामूली राहत होगी.

ब्रिटेन के मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बीते वर्ष की तुलना में 2021 में दुनिया थोड़ी कम गर्म रह सकती है, लेकिन ग्रीनहाउस गैस के कारण यह वर्ष भी सर्वाधिक गर्म वर्षों में से एक दर्ज होगा. प्रशांत महासागर में ला नीना वेदर पैटर्न के कारण भूमध्यसागर के पश्चिम की तरफ तेज हवा के चलने से समुद्र की सतह का पानी उड़ जायेगा, परिणामस्वरूप महासागर के तापमान में दो डिग्री की कमी आ सकती है़

महासागर के तापमान में होनेवाले इस परिवर्तन से दुनियाभर में तापमान में बदलाव देखने को मिलेगा़ इस कारण ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और पूर्वी एशिया में जहां ज्यादा बारिश हो सकती है, वहीं दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका को सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है़

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