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हिमाचल प्रदेश: 'पापा, क्या हम भी मर जाएंगे', शिमला में हुई तबाही का आंखों देखा हाल पढ़ें

Updated at : 17 Aug 2023 3:52 PM (IST)
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हिमाचल प्रदेश: 'पापा, क्या हम भी मर जाएंगे', शिमला में हुई तबाही का आंखों देखा हाल पढ़ें

**EDS: IMAGE VIA @TTRHimachal** Shimla: A portion of the Kalka-Shimla railway track washed away due to heavy rains, near Shimla, Monday, Aug. 14, 2023. (PTI Photo)(PTI08_14_2023_000210B)

भूस्खलन से सहमे लोग जिनके घर अभी भी सही सलामत थे, वे वहां से जाने लगे और जो कुछ भी ले जा सकते थे, ले गये. एक छोटी लड़की ने एक बैग पकड़ा रखा था और वह सिसक रही थी. पढ़ें शिमला में हुई तबाही का आंखों देखा हाल

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हिमाचल प्रदेश में बारिश का तांडव जारी है. स्वतंत्रता दिवस पर जब विनाशकारी बारिश ने कहर बरपाया, आसपास की जमीन धंसने लगी तो मेरी छह साल की बेटी ने पूछा, “पापा, क्या हम भी मर जाएंगे, क्या हमारा घर भी टूट जाएगा.” जोरदार आवाज सुनकर हमारा परिवार बाहर निकल आया. हमारे घर से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर, एक नाले के पार एक पहाड़ी का किनारा खिसकने से चीख-पुकार मच गई. कुछ बहुमंजिला मकान, कुछ अस्थायी घर और एक बूचड़खाना मलबे के नीचे दब गये. जब कृष्णानगर इलाके में यह भूस्खलन हुआ तो हमारी बेटी पहले से ही परेशान थी. उसके स्कूल में नर्सरी और कक्षा दो में पढ़ने वाली दो लड़कियों की सोमवार को उस समय मौत हो गई थी, जब भूस्खलन के कारण समर हिल इलाके में एक शिव मंदिर ढह गया था.

लेकिन हमारे लिए घर के पास हुआ भूस्खलन अधिक हृदय विदारक था, भले ही हताहतों की संख्या शिव मंदिर की तुलना में बहुत कम थी. कृष्णानगर के घरों में दरारें आनी शुरू हो गई थीं और ज्यादातर लोग घंटों पहले ही घर खाली कर चुके थे. कुछ मिनट बाद जब मैं घटनास्थल पर पहुंचा तो अपना घर खो चुके लोग चिल्ला रहे थे. एक महिला अपने पति की तलाश में नंगे पैर इधर-उधर भाग रही थी. बूचड़खाने में एक कर्मचारी अपने प्रबंधक की तलाश कर रहा था. बचावकर्मियों को लोगों को बचाने में काफी दिक्कत हो रही थी क्योंकि कीचड़ लगातार गिर रहा था.

वह सिसक रही थी….

भूस्खलन से सहमे लोग जिनके घर अभी भी सही सलामत थे, वे वहां से जाने लगे और जो कुछ भी ले जा सकते थे, ले गये. एक छोटी लड़की ने एक बैग पकड़ा रखा था और वह सिसक रही थी. एक व्यक्ति अपनी बूढ़ी मां को अपने कंधों पर उठाकर ले गया. मैं खबर देने के लिए रवाना हो गया. मेरे घर-कार्यालय और शिमला के अन्य इलाकों में दो दिन से बिजली नहीं है और मैंने अपने फोन पर खबर लिखी. फोन को बार-बार कार में लगे चार्जर से चार्ज करना पड़ा. बाद में पुलिस के एक अधिकारी ने मुझे बताया कि मलबे से दो शव निकाले गये. उनमें से एक का सिर धड़ से अलग था.

शिमला जिले में 30 से ज्यादा लोगों की मौत

तीन दिन हुई बारिश से त्रस्त हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तबाही की कहानी बयां कर रही है. अन्य जगहों पर भी भूस्खलन हुआ है. शहर गिरे हुए पेड़ों और टूटी हुई बिजली लाइनों से पटा हुआ है. सड़कों पर दरारें आ गई हैं और कई इमारतें खतरे में हैं. शिमला में स्थित कार्ट रोड भूस्खलन के कारण अवरुद्ध है, जिसके कारण कुछ जर्जर इमारतों के ढहने की आशंका है. माल रोड सुनसान पड़ा है और पर्यटक नदारद हैं. शिमला जिले में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. तीन दिन हुई बारिश में मरने वालों की संख्या बुधवार को 70 से अधिक हो गई तथा मलबे में और शव दबे होने की आशंका है.

मुख्यमंत्री ने और अधिक मौसम केंद्र स्थापित करने का आह्वान किया

इधर, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को राज्य में और अधिक मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) स्थापित करने की योजना पर कार्य करने का निर्देश दिया ताकि मौसम पूर्वानुमान से संबंधित ‘रियल टाइम’ आंकड़े प्राप्त किये जा सकें. फिलहाल शिमला, धर्मशाला, डलहौजी और कुफरी सहित राज्य में कई स्थानों पर 23 एडब्ल्यूएस हैं. यहां गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि बुधवार देर शाम शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संबंधित विभागों को एडब्ल्यूएस की संख्या बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया.

Also Read: हिमाचल प्रदेश की आपदा के लिए बिहारी राजमिस्त्री जिम्मेदार? सुखविंदर सिंह सुक्खू का बयान हुआ वायरल, दी ये सफाई

उन्होंने राज्य में एक मौसम वेधशाला केंद्र स्थापित करने पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए और आपातकालीन स्थितियों के दौरान उन्हें अद्यतन उपकरण और प्रौद्योगिकी प्रदान की जानी चाहिए. सुक्खू ने कहा कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में नीचे फंसे लोगों को बचाने के लिए भारी संरचनाओं को उठाने और काटने के लिए अधिक हाई-टेक मशीनरी की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हाल ही में राजधानी में बारिश की वजह से उत्पन्न स्थिति इसका उदाहरण है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुल्लू में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हवाई मार्ग से ले जाने के लिए एक अतिरिक्त हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जाए.

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