COVID19 : अस्पताल से डिस्चार्ज करने की नीति में बदलाव, जानें अब क्या होगी प्रक्रिया
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 11 May 2020 5:02 PM
Health Ministry informed discharge policy of COVID19 patient changed : देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने अस्पताल से डिस्चार्ज करने की नीति में थोड़ा बदलाव किया है. जिसके तहत सरकार ने यह तय किया है कि माइल्ड और बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों को अस्पताल में रहते हुए अगर 10 दिन हो जाये और तीन दिनों तक बिना दवा के बुखार ना आये तो उन्हें अस्पताल से बिना दोबारा जांच किये डिस्चार्ज कर दिया जायेगा.
देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने यह बताया कि सरकार ने अस्पताल से डिस्चार्ज करने की नीति में थोड़ा बदलाव किया है. जिसके तहत सरकार ने यह तय किया है कि माइल्ड और बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों को अस्पताल में रहते हुए अगर 10 दिन हो जाये और तीन दिनों तक बिना दवा के बुखार ना आये तो उन्हें अस्पताल से बिना दोबारा जांच किये डिस्चार्ज कर दिया जायेगा. डिस्चार्ज के बाद भी मरीज को सात दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गयी है. लव अग्रवाल ने बताया कि कई देशों ने लक्षण और समय के आधार पर अपने रणनीति में बदलाव किया है और हमने भी ऐसा ही किया है. धर्म के आधार पर कोरोना वायरस के संक्रमण की मैपिंग की खबरों पर लव अग्रवाल ने कहा कि यह बहुत ही गैरजिम्मेदाराना समाचार है. यह वायरस जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर अपना संक्रमण नहीं फैलाता है.
वंदे भारत मिशन के तहत 4000 भारतीयों को वापस लाया गया : वंदे भारत मिशन के तहत 23 विमानों से 4000 भारतीयों को वापस लाया गया, जबकि पांच लाख प्रवासी मजदूरों को 468 ट्रेन के जरिये उन्हें घर वापस भेजा. कल 101 स्पेशल ट्रेन चलायी गयी. इस बात की जानकारी गृहमंत्रालय की ओर से दी गयी.
आरोग्य सेतु एप कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम : आरोग्य सेतु एप ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है. इस एप ने लोगों को ना सिर्फ स्व मूल्यांकन की सुविधा दी है, साथ ही यह खतरे में रहने वाले लोगों को अलर्ट भी करता है. इस एप के जरिये हम पॉजिटिव मरीजों के डाटा का अध्ययन करते हैं और इसके जरिये हॉटस्पॉट बनने से रोका जा सकता है. इस एप में डाटा की निजता का बहुत ध्यान रखा जाता है और किसी के डाटा का भी गलत इस्तेमाल संभव नहीं है. 9.8 लोगों ने आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड किया है, जिनमें से सिर्फ 13 हजार लोगों का डाटा सर्वर तक ले जाया गया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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