Farmers Protest: घर-गृहस्थी संभालने के साथ ही किसानों के प्रदर्शन में भी साथ दे रही हैं महिलाएं

Updated at : 13 Dec 2020 5:39 PM (IST)
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Farmers Protest: घर-गृहस्थी संभालने के साथ ही किसानों के प्रदर्शन में भी साथ दे रही हैं महिलाएं

Bathinda: Members of various farmer organisations stage a sit-in protest against Centre's farm reform laws, at Lehragaga Toll Plaza in Bathinda, Saturday, Dec. 12, 2020. (PTI Photo)(PTI12-12-2020_000097A)

Farmers Protest नयी दिल्ली : खेत और परिवार की जिम्मेदारियों से घिरी पंजाब और हरियाणा की सैकड़ों महिलाएं अब किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) में शामिल होकर अपनी व्यस्त जिंदगी के एक अलग ही पहलु से रू-ब-रू हो रही हैं. दोनों राज्यों से आईं ये महिलाएं दिल्ली के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर किसानों के साथ कृषि कानूनों (Farm Laws 2020) का विरोध कर रही हैं. केंद्र द्वारा लाए गये तीन कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए जब उनके पति, बेटा और भाई घर से निकले तो वे भी उनके साथ हो लीं और गांव से राष्ट्रीय राजधानी की तरीफ कूच कर दिया.

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Farmers Protest नयी दिल्ली : खेत और परिवार की जिम्मेदारियों से घिरी पंजाब और हरियाणा की सैकड़ों महिलाएं अब किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) में शामिल होकर अपनी व्यस्त जिंदगी के एक अलग ही पहलु से रू-ब-रू हो रही हैं. दोनों राज्यों से आईं ये महिलाएं दिल्ली के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर किसानों के साथ कृषि कानूनों (Farm Laws 2020) का विरोध कर रही हैं. केंद्र द्वारा लाए गये तीन कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए जब उनके पति, बेटा और भाई घर से निकले तो वे भी उनके साथ हो लीं और गांव से राष्ट्रीय राजधानी की तरीफ कूच कर दिया.

लुधियाना की रहने वाली 53 वर्षीय मनदीप कौर ने कहा, ‘खेती के पेशे की पहचान लिंग से नहीं की जा सकती है. हमारे खेतों में मर्द और औरत के आधार पर फसल पैदा नहीं होती. कई पुरुष किसान यहां प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में हमें घरों में क्यों बैठना चाहिए.’ उन्होंने रूढ़िवादी भूमिका को भी खारिज कर दिया. मनदीप बस के जरिये सिंघु बॉर्डर पर आई जहां पर करीब दो हफ्ते से किसानों का प्रदर्शन चल रहा है और रात में प्रदर्शन कर घर लौट गई.

उन्होंने कहा, ‘मैं वापस आऊंगी. हमें अपना घर भी देखना है और लड़ाई भी जारी रखनी है. यहां आने से पहले मैंने खेतों में सिंचाई की और मेरे लौटने तक उसमें नमी रहेगी.’ उल्लेखनीय है कि दिल्ली को पंजाब के शहरों से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर जहां पुरुष प्रदर्शनकारी जमें हुए हैं, वहीं महिलाएं प्रदर्शन स्थल और अपने घरों के बीच संतुलन बनाने के लिए आ-जा रही हैं ताकि घर और खेतों की देखभाल भी कर सकें और प्रदर्शन में भी अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सकें.

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मनदीप के साथ बस से पांच घंटे का सफर कर लुधियाना से सिंघु बॉर्डर उनकी पड़ोसी सुखविंदर कौर भी पहुंची हैं. कौर 68 वर्षीय विधवा हैं और घर में बैठ कर उब गई थीं क्योंकि परिवार के पुरुष सदस्य प्रदर्शन स्थल पर हैं और इसलिए उन्होंने थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन दिल्ली की सीमा पर आने का फैसला किया.

उन्होंने कहा, ‘मैं रात को ठीक से सो नहीं पा रही थी. मैं घर में नहीं बैठ सकती जब भाई और भांजे और मेरे सभी किसान भाई यहां लड़ रहे हैं. यहां आने पर पहली बार रात को मैं ठीक से सोई.’ उन्होंने कहा कि यहां पर सुविधा नहीं है और शौचालय की समस्या है लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उल्लेखनीय है कि मनदीप कौर सहित सैकड़ों महिलाएं अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन खालसा ऐड द्वारा मुहैया कराये गये टेंट में रह रही हैं.

Posted By: Amlesh Nandan.

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