किसान नेता डल्लेवाल को अस्पताल में भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार ने मांगा और वक्त
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 31 Dec 2024 12:21 PM
सुप्रीम कोर्ट
Farmers Protest : किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पंजाब सरकार ने कोर्ट से और समय मांगा है.
Farmers Protest : पंजाब सरकार ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को अस्पताल में भेजने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन के लिए और तीन दिन का समय मांगा है. मान सरकार ने कहा है कि प्रदर्शनकारी किसानों के साथ विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है. डल्लेवाल को अस्पताल भेजने की कोशिश की जा रही है. शीर्ष कोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा किसान नेता डल्लेवाल को अस्पताल में ट्रांसफर करने संबंधी अपने आदेश के अनुपालन पर सुनवाई दो जनवरी तक टाल दी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अवकाशकालीन पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए दो जनवरी की तारीख तय की है.
पंजाब सरकार की टीम ने डल्लेवाल से फिर मुलाकात की
अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को अस्पताल ले जाने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है. सोमवार को पंजाब सरकार ने डल्लेवाल को डॉक्टरों की सहायता लेने के लिए मनाने के प्रयास तेज कर दिए. हालांकि, वे अबतक नहीं माने हैं. अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को को 36वें दिन में प्रवेश कर गई है. कोर्ट ने पिछली सुनवाई में पंजाब सरकार को डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था, साथ ही राज्य सरकार को आवश्यकता पड़ने पर केंद्र से सहायता लेने की भी छूट दी.
किसान क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन
फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए किसान पंजाब-हरियाणा सीमा पर खनौरी में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 28 दिसंबर को डल्लेवाल को अस्पताल न ले जाने के लिए पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी.
क्या है किसानों की मुख्य मांग
- एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग किसान कर रहे हैं.
- किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि कीमत स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार तय हो.
- किसान कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं.
- आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवार को मुआवजा देने की मांग भी किसान कर रहे हैं.
सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली कूच से रोके जाने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर बैठे हुए हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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