2027 की राह मुश्किल: ‘आप’ पर दबाव, केजरीवाल के सामने ये है सबसे बड़ी चुनौती

Published by :Amitabh Kumar
Published at :25 Apr 2026 7:54 AM (IST)
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Raghav Chadha
राघव चड्ढा ने छोड़ी आप (Photo: PTI)

Raghav Chadha : सात सांसदों के आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ने से 2027 के चुनाव को लेकर तैयारियों पर बड़ा असर पड़ सकता है. संगठन कमजोर होने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिर सकता है.

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Raghav Chadha : राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल जैसे प्रमुख चेहरों सहित सात सांसदों के शुक्रवार (24 अप्रैल) को आप छोड़ने के साथ, न केवल संसद में ‘आप’ का संख्या बल घटा है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए उसकी तैयारियों में भी परेशानी आ सकती है. आप के सात सांसदों का इस्तीफा ऐसे वक्त आया है जब पार्टी अगले साल गुजरात, गोवा और पंजाब के चुनावों की तैयारी में लगी है. दिल्ली में तीन बार सरकार बना चुकी पार्टी का मजबूत जनाधार है, लेकिन अब ये झटका उसके लिए चुनौती बन सकती है.

आप के सामने अभी बड़ी चुनौती क्या है?

गुजरात, गोवा और पंजाब चुनाव को देखते हुए अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सामने अभी बड़ी चुनौती है- संगठन को संभालना, नेतृत्व को फिर से मजबूत करना और कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखना कि पार्टी अपने पुराने सिद्धांतों पर ही चल रही है.

कुमार विश्वास जैसे बड़े चेहरे पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं

आप के नेताओं का कहना है कि कुछ नेताओं के जाने के बावजूद पार्टी का जमीनी जुड़ाव और काम करने का तरीका पहले जैसा ही मजबूत है. पार्टी अभी भी पंजाब में सत्ता में है और दिल्ली में भी उसकी पकड़ बनी हुई है. साथ ही गुजरात और जम्मू-कश्मीर में भी मौजूदगी है. हालांकि राज्यसभा में संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह जाने से उसकी आवाज थोड़ी कमजोर हो सकती है. पहले भी किरण बेदी और कुमार विश्वास जैसे बड़े चेहरे पार्टी छोड़ चुके हैं.

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साल 2015 में, आम आदमी पार्टी की पूर्व प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने पार्टी छोड़ दी और बाद में बीजेपी में शामिल हो गईं. इसके बाद, पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हुए तीखे विवाद के बाद वरिष्ठ नेता कपिल मिश्रा ने भी 2017 में पार्टी छोड़ दी. 2018 में, संस्थापक सदस्य आशीष खेतान ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए सक्रिय राजनीति से पूरी तरह से किनारा कर लिया. ये सभी बदलाव ऐसे समय में हुए, जब ‘आप’ पार्टी अपना विस्तार करने का प्रयास कर रही थी.

पिछले दो साल में पार्टी में काफी उथल-पुथल

पिछले दो साल पार्टी के लिए काफी उथल-पुथल भरे रहे और इसी बीच ये घटनाक्रम सामने आया. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत कई बड़े नेताओं को एक्साइज पॉलिसी मामले में गिरफ्तार किया गया था. उस वक्त राघव चड्ढा जैसे दूसरे लाइन के नेता आगे आए और उन्होंने सरकार और संगठन दोनों को संभालने की जिम्मेदारी उठाई.

आप के लिए बड़ा झटका है सात सांसदों का पार्टी छोड़ना

इन सात सांसदों में कई ऐसे थे जो पार्टी की रीढ़ माने जाते थे. चाहे नीति बनाना हो, रणनीति तय करना, फंड संभालना या जनता तक मैसेज पहुंचाना हो, ये नेता पार्टी के लिए खास थे. अब उनके एक साथ जाने को सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है. चड्ढा ने कहा कि सात सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया है. उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी अपने सिद्धांतों एवं मूल्यों से भटक गई है. चड्ढा के अलावा, पाठक, मित्तल, सिंह और मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी ने भी केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ दी है.

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Amitabh Kumar

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By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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