Coronavirus : केवल लॉकडाउन से नहीं रुकेगा कोरोना, अपनाना होगा चीन का GPS तकनीकी
Author : ArbindKumar Mishra Published by : Prabhat Khabar Updated At : 29 Mar 2020 7:51 PM
Vijayawada: Pedestrians walk across a road as security personnel wearing masks stand guard during the nationwide lockdown amid coronavirus pandemic, in Vijayawada, Wednesday, Mar 25, 2020. (PTI Photo)(PTI25-03-2020_000235A)
कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये राज्यों की जरूरत के आधार पर पहली कार्ययोजना दिल्ली के लिये बनाने वाले ‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान' (आईएलबीएस) के निदेशक डा एस के सरीन ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को संक्रमण रोकने के लिये प्रत्येक संदिग्ध मरीज के संपर्क में आये हर एक व्यक्ति की पहचान के लिये चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये राज्यों की जरूरत के आधार पर पहली कार्ययोजना दिल्ली के लिये बनाने वाले ‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ (आईएलबीएस) के निदेशक डा एस के सरीन ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को संक्रमण रोकने के लिये प्रत्येक संदिग्ध मरीज के संपर्क में आये हर एक व्यक्ति की पहचान के लिये चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.
उनका मानना है कि वायरस का संक्रमण तीसरे चरण में जाने से रोकने के लिये सभी राज्यों को तत्काल तीसरे चरण की तैयारियों को लागू करना जरूरी है. इसी विषय पर डा. सरीन से पांच सवाल और उनके जवाब.
जवाब : बिल्कुल नहीं. वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के संक्रमण की दर और कोरोना समूह के वायरस की प्रकृति को देखते हुये भारत में राज्यों के स्तर पर प्रत्येक राज्य में संक्रमण के प्रसार की गति के मुताबिक रणनीति बनानी होगी.
दिल्ली के लिये हमने जो रणनीति बनायी है उसमें प्रतिदिन 100 मरीज, फिर 500 मरीज और तब 1000 मरीज तक सामने आने वाली तीन स्थितियों के लिये कार्ययोजना लागू की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली या देश तीसरे चरण में पहुंच गया है. हालात की गंभीरता को देखते हुये अब राज्यों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिये अपनी रणनीति लागू करने हेतु संक्रमण के किसी चरण की घोषणा होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.
जवाब: इसमें तीन बातों पर जोर दिया है. पहला, संक्रमण के संदिग्ध लोगों के संपर्क में आये प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचने के लिये जीपीएस जैसी तकनीकों का सहारा लेना होगा. दूसरा जरूरी काम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है. इसके लिये लोगों को जागरूक कर संक्रमण के लक्षणों को छुपाने के बजाय खुद उजागर करने के लिये प्रेरित किया जाना है और तीसरा, परीक्षण क्षमता को मांग की तुलना में काफी अधिक रखना है. राज्यों के स्तर पर इन तीन कामों की बदौलत ही संक्रमण को दूसरे चरण तक सीमित रखा जा सकता है.
जवाब: संक्रमण को रोकने का एकमात्र विकल्प ‘कांटेक्ट ट्रेसिंग’ (संदिग्ध मरीजों के संपर्क को खंगालना) है. चीन में संक्रमित मरीजों के संपर्क में आये लगभग 26 हजार लोगों की पहचान हुयी, उनमें से 2,58,00 तक जीपीएस की मदद से पहुंचा जा सका. अभी हम उन लोगों की जांच कर रहे हैं जिनमें वायरस के लक्षण दिखने लगे हैं. जबकि लक्षण दिखने के दो दिन पहले ही संभावित मरीज से संक्रमण दूसरों में फैलने लगता है. इसलिये हमारे लिये यह जरूरी है कि ऐसे संभावित मरीजों के संपर्क में दो दिन पहले जितने लोग भी आये उन्हें भी हम जांच के दायरे में लायें. इसके लिये लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है. अकेली सरकार इस नेटवर्क को कवर नहीं कर सकती है. मामूली सी आशंका दिखने पर भी लोग स्वयं परीक्षण के लिये आगे आयें. संक्रमण के तीसरे चरण में जाने से बचने का यह जरूरी उपाय है.
जवाब : दिल्ली के लिये जो रणनीति बनायी है, उसे कोई भी राज्य अपना सकता है. यह सही है कि इस कार्ययोजना को दिल्ली की जरूरतों एवं मौजूदा ढांचागत सुविधाओं के मुताबिक बनाया है. इसे दूसरे राज्यों की जरूरत और मौजूदा सुविधाओं के मुताबिक तब्दील कर लागू किया जा सकता है. यह काम राज्य अपने स्तर पर भी कर सकते हैं. फिलहाल सभी के लिये तीन काम करना जरूरी हैं, जांच का दायरा बढ़ा कर ऐसे हर व्यक्ति की जांच करें जिसमें संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखने लगें हों, जनभागीदारी सुनिश्चित करें जिससे जांच के लिये लोग खुद आगे आयें और जांच के इंतजामों को युद्धस्तर पर व्यापक बनायें.
जवाब : देश में जो स्थिति है, उसे देखते हुये लॉकडाउन कितना असरकारी है, यह एक अप्रैल के बाद ही पता चल सकेगा. बेशक लॉकडाउन से संक्रमण के मामले बढ़ने में कमी आती है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति 2.9 लोगों में संक्रमण फैलाता है और लाकडाउन में यह संख्या घटकर 2.0 हो जाती है, शून्य नहीं. लॉकडाउन का असर दस दिन में पता चलता है. फिलहाल संक्रमित और संदिग्ध मरीजों के दायरे में आये प्रत्येक व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने पर ही पूरा दारोमदार टिका है और इसके लिये लोगों को जांच के लिये खुद सामने आना होगा. अब इस स्थिति में सरकार के साथ लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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