Coronavirus : केवल लॉकडाउन से नहीं रुकेगा कोरोना, अपनाना होगा चीन का GPS तकनीकी

Vijayawada: Pedestrians walk across a road as security personnel wearing masks stand guard during the nationwide lockdown amid coronavirus pandemic, in Vijayawada, Wednesday, Mar 25, 2020. (PTI Photo)(PTI25-03-2020_000235A)
कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये राज्यों की जरूरत के आधार पर पहली कार्ययोजना दिल्ली के लिये बनाने वाले ‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ (आईएलबीएस) के निदेशक डा एस के सरीन ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को संक्रमण रोकने के लिये प्रत्येक संदिग्ध मरीज के संपर्क में आये हर एक व्यक्ति की पहचान के लिये चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये राज्यों की जरूरत के आधार पर पहली कार्ययोजना दिल्ली के लिये बनाने वाले ‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ (आईएलबीएस) के निदेशक डा एस के सरीन ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को संक्रमण रोकने के लिये प्रत्येक संदिग्ध मरीज के संपर्क में आये हर एक व्यक्ति की पहचान के लिये चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.
उनका मानना है कि वायरस का संक्रमण तीसरे चरण में जाने से रोकने के लिये सभी राज्यों को तत्काल तीसरे चरण की तैयारियों को लागू करना जरूरी है. इसी विषय पर डा. सरीन से पांच सवाल और उनके जवाब.
जवाब : बिल्कुल नहीं. वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के संक्रमण की दर और कोरोना समूह के वायरस की प्रकृति को देखते हुये भारत में राज्यों के स्तर पर प्रत्येक राज्य में संक्रमण के प्रसार की गति के मुताबिक रणनीति बनानी होगी.
दिल्ली के लिये हमने जो रणनीति बनायी है उसमें प्रतिदिन 100 मरीज, फिर 500 मरीज और तब 1000 मरीज तक सामने आने वाली तीन स्थितियों के लिये कार्ययोजना लागू की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली या देश तीसरे चरण में पहुंच गया है. हालात की गंभीरता को देखते हुये अब राज्यों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिये अपनी रणनीति लागू करने हेतु संक्रमण के किसी चरण की घोषणा होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.
जवाब: इसमें तीन बातों पर जोर दिया है. पहला, संक्रमण के संदिग्ध लोगों के संपर्क में आये प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचने के लिये जीपीएस जैसी तकनीकों का सहारा लेना होगा. दूसरा जरूरी काम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है. इसके लिये लोगों को जागरूक कर संक्रमण के लक्षणों को छुपाने के बजाय खुद उजागर करने के लिये प्रेरित किया जाना है और तीसरा, परीक्षण क्षमता को मांग की तुलना में काफी अधिक रखना है. राज्यों के स्तर पर इन तीन कामों की बदौलत ही संक्रमण को दूसरे चरण तक सीमित रखा जा सकता है.
जवाब: संक्रमण को रोकने का एकमात्र विकल्प ‘कांटेक्ट ट्रेसिंग’ (संदिग्ध मरीजों के संपर्क को खंगालना) है. चीन में संक्रमित मरीजों के संपर्क में आये लगभग 26 हजार लोगों की पहचान हुयी, उनमें से 2,58,00 तक जीपीएस की मदद से पहुंचा जा सका. अभी हम उन लोगों की जांच कर रहे हैं जिनमें वायरस के लक्षण दिखने लगे हैं. जबकि लक्षण दिखने के दो दिन पहले ही संभावित मरीज से संक्रमण दूसरों में फैलने लगता है. इसलिये हमारे लिये यह जरूरी है कि ऐसे संभावित मरीजों के संपर्क में दो दिन पहले जितने लोग भी आये उन्हें भी हम जांच के दायरे में लायें. इसके लिये लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है. अकेली सरकार इस नेटवर्क को कवर नहीं कर सकती है. मामूली सी आशंका दिखने पर भी लोग स्वयं परीक्षण के लिये आगे आयें. संक्रमण के तीसरे चरण में जाने से बचने का यह जरूरी उपाय है.
जवाब : दिल्ली के लिये जो रणनीति बनायी है, उसे कोई भी राज्य अपना सकता है. यह सही है कि इस कार्ययोजना को दिल्ली की जरूरतों एवं मौजूदा ढांचागत सुविधाओं के मुताबिक बनाया है. इसे दूसरे राज्यों की जरूरत और मौजूदा सुविधाओं के मुताबिक तब्दील कर लागू किया जा सकता है. यह काम राज्य अपने स्तर पर भी कर सकते हैं. फिलहाल सभी के लिये तीन काम करना जरूरी हैं, जांच का दायरा बढ़ा कर ऐसे हर व्यक्ति की जांच करें जिसमें संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखने लगें हों, जनभागीदारी सुनिश्चित करें जिससे जांच के लिये लोग खुद आगे आयें और जांच के इंतजामों को युद्धस्तर पर व्यापक बनायें.
जवाब : देश में जो स्थिति है, उसे देखते हुये लॉकडाउन कितना असरकारी है, यह एक अप्रैल के बाद ही पता चल सकेगा. बेशक लॉकडाउन से संक्रमण के मामले बढ़ने में कमी आती है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति 2.9 लोगों में संक्रमण फैलाता है और लाकडाउन में यह संख्या घटकर 2.0 हो जाती है, शून्य नहीं. लॉकडाउन का असर दस दिन में पता चलता है. फिलहाल संक्रमित और संदिग्ध मरीजों के दायरे में आये प्रत्येक व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने पर ही पूरा दारोमदार टिका है और इसके लिये लोगों को जांच के लिये खुद सामने आना होगा. अब इस स्थिति में सरकार के साथ लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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