हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन खाकर कोरोना से जंग लड़ रही हैं मिशिगन की सांसद : डोनाल्ड ट्रंप

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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन खाकर कोरोना से जंग लड़ रही हैं मिशिगन की सांसद : डोनाल्ड ट्रंप

Donald Trump said Michigan MP is fighting a war against Coronavirus : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी की एक सांसद ने कोरोना वायरस से अपनी जान बचने का श्रेय मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ को दिया है.

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वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी की एक सांसद ने कोरोना वायरस से अपनी जान बचने का श्रेय मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ को दिया है.

कोविड-19 के उपचार में ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ के इस्तेमाल के दुष्प्रभावों पर गहन बहस के बीच, ट्रम्प लगातार इस दवा को कोविड-19 के इलाज के एक विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि इस घातक वायरस के लिए अभी तक कोई सार्थक उपचार सामने नहीं आया है. यह वायरस अब तक 12,800 से अधिक अमेरिकियों की जान ले चुका है.

अमेरिका में मंगलवार को केवल एक ही दिन में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो गयी मिशिगन राज्य की प्रतिनिधि कैरेन व्हिटसेट ने कहा कि वह और उनके पति हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेना शुरू करने के बाद ही अपने जीवन को कोरोना वायरस से बचा सके एक समाचार चैनल पर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस दवा की बात करते देख उन्होंने अपने डॉक्टर से इसे देने के लिए कहा ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस महिला के बारे में मुझे लगा था कि शायद वह नहीं बचेंगी वह एक डेमोक्रेट सांसद हैं, काफी सम्मानित अफ्रीकी-अमेरिकी महिला हैं.

जिस तरह से उन्होंने अपनी कहानी बताई वह बहुत सुंदर है ‘‘मैंने अपने पति से जाकर यह दवा लाने को कहा उन्हें वह दवा मिल गई” वह अब ठीक हैं कल रात टेलीविजन पर उनका साक्षात्कार हुआ और उन्होंने मुझे धन्यवाद दिया”. ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में बताया ‘‘ महिला सांसद ने ट्वीट के जरिए भी मुझे धन्यवाद दिया उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद करना चाहती हूं. उन्होंने मेरी जिंदगी बचा ली देखिए, मैं नहीं कहता कि हर किसी के साथ ऐसा होता है लेकिन ये एक खूबसूरत कहानी है ऐसी बहुत सी कहानियां हैं और मैं कहता हूं कि इसे (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन)इस्तेमाल करके देखें”.

लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इस दवा की सिफारिश डाक्टर द्वारा किया जाना जरूरी है. ‘‘ डाक्टर से लिखवाना होगा मैं कोई डॉक्टर नहीं हूं. मैं केवल इतना कह रहा हूं कि हमने इसके अच्छे परिणामों के बारे में सुना है और कुछ लोगों ने कहा है कि चलिए पहले लैब में इसका परीक्षण कराएं कुछ सालों तक इसका परीक्षण कराएं नहीं. इस देश में और पूरी दुनिया में लोग मर रहे हैं ” महिला सांसद ने डेट्रायट फ्री प्रेस जर्नल को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि सोमवार को उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई और ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ लेने के दो घंटे से भी कम समय में उन्हें बेहतर महसूस होना शुरू हो गया.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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