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क्या आप जानते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस में 16 साल बाद दोबारा क्यों बहाल किया गया सचिन वाजे और क्या है उसका पॉलिटिकल कनेक्शन?

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
गिरफ्तार सचिन वाजे.
गिरफ्तार सचिन वाजे.
फाइल फोटो.

Ambani Explosive Case : सचिन वाजे महाराष्ट्र पुलिस का बर्खास्त सहायक सब इंस्पेक्टर. आज यह नाम महाराष्ट्र समेत पूरे देश में चर्चित है. हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर यह सचिन वाजे है कौन और इसका पॉलिटिकल कनेक्शन क्या है, जो 16 साल बाद महाराष्ट्र पुलिस में दोबारा बहाल किया गया? कोई न कोई रसूखी वजह रही होगी, जिसकी बदौलत 2004 में गिरफ्तार 1990 बैच के पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट घाटकोपर धमाका मामले के संदिग्ध की पुलिस हिरासत में मौत के बाद निलंबित कर दिया गया था? आखिर यह कौन आदमी है, जिसकी वजह से महाराष्ट्र सरकार की चूलें तक हिल रही हैं?

फिलहाल, भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों के साथ बरामद स्कॉर्पियों कार और उसके बाद उस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थिति में शव बरामद होने से महाराष्ट्र में प्रशासनिक और राजनीतिक तौर पर हड़कंप मचा हुआ है. इस पूरे मामले में सचिन वाजे केंद्रीय भूमिका में है. सचिन वाजे की वजह से महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख की कुर्सी खतरे में पड़ी हुई है. आलम यह कि खुद की कुर्सी बचाने के लिए अनिल देशमुख एनसीपी प्रमुख शरद पवार के दिल्ली स्थित घर पर परिक्रमा भी लगा चुके हैं.

उधर, एंटीलिया मामले में एनआईए ने मंगलवार को एक और काले रंग की मर्सिडीज कार बरामद करने के साथ क्राइम सीन को रीक्रिएट भी किया है. काले रंग की मर्सिडीज को लेकर यह कहा जा रहा है कि वे सचिन वाजे ही इस्तेमाल करते थे. इस घटना के एक दिन बाद मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को हटाया दिया गया.

वाजे पर लगाए गए कई आरोप

अब तक मीडिया की खबरों से मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में घाटकोपर धमाका मामले के संदिग्ध ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में हुई कथित हत्या के मामले में 16 साल पहले तीन कांस्टेबलों के साथ सहायक सब इंस्पेक्टर सचिन वाजे को 2004 में निलंबित कर दिया गया था. वाजे पर यूनुस मामले में हत्या के सबूतों को मिटाने सहित कई आरोप लगाए गए थे.

16 साल बाद दोबारा बहाल हुआ सचिन वाजे

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, करीब 16 साल बाद पुलिस सेवा में दोबारा बहाल होने के बाद सहायक सब इंस्पेक्टर सचिन वाजे, कांस्टेबल राजेन्द्र तिवारी, सुनील देसाई ने स्थानीय हथियार इकाई में काम संभाला, तो कांस्टेबल राजाराम निकम को मोटर वाहन विभाग में तैनाती दी गई. अधिकारी ने बताया कि वाजे ने नवंबर 2007 में पुलिस बल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उसके खिलाफ जांच लंबित होने के कारण उसका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया. महाराष्ट्र के परभणी का रहने वाला 27 वर्षीय ख्वाजा यूनुस एक इंजीनियर था और दुबई में काम करता था. उसे दिसंबर 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट मामले के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था.

यूनुस मामले में 14 पुलिसकर्मी ठहराए गए थे दोषी

पुलिस ने दावा किया था कि यूनुस को जब पूछताछ के लिए औरंगाबाद ले जाते वक्त वह फरार हो गया था, लेकिन बंबई हाईकोर्ट के आदेश पर सीआईडी द्वारा की गई जांच में उसने कहा कि पुलिस हिरासत में ख्वाजा की मौत हो गई थी. जांच में 14 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन सरकार ने केवल वाजे, तिवारी, निकम और देसाई पर ही मुकदमा चलाने की मंजूरी दी. अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने पहले यहां एक सत्र अदालत को बताया था कि यूनुस को हिरासत में कपड़े उतार कर बेल्ट से छाती और पेट पर वार किया गया था.

2008 में शिवसेना में शामिल हो गया था वाजे

एक अधिकारी ने कहा कि 2004 में ख्वाजा यूनुस मामले में वाजे की कथित भूमिका के कारण उसे निलंबित कर दिया गया था और बाद में 2007 में अपना इस्तीफा सौंप दिया था. हालांकि, इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था और इसलिए उसे फिर से बहाल किया जा सकता था. इस्तीफा देने के बाद वाजे साल 2008 में शिवसेना में शामिल हो गए. उनके वकील ने कहा कि वह कुछ समय के लिए शिवसेना में थे.

शीना बोरा मामले में किताब भी लिखी

वाजे ने चर्चित शीना बोरा हत्या मामले में और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी. एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वाजे निलंबन में था, तब कुछ जांच एजेंसियों द्वारा भी उसकी सेवा ली गई. वह कई समाचार चैनलों पर एक 'विशेषज्ञ' के रूप में भी शामिल किया गया. वाजे ने अपने करियर की शुरुआत ठाणे में की थी. जहां उसने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर इलाके में सक्रिय सुरेश मांचेकर गिरोह पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई थी. जब ठाणे का एक आईपीएस अधिकारी मुंबई चला गया, तो उसके साथ वाजे भी चला गया. यहां वह क्राइम ब्रांच सीआईयू के साथ तैनात था, जहां वह 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' प्रदीप शर्मा के साथ काम करता था.

एंटीलिया केस से संदेह के घेरे में मुंबई पुलिस

फिलहाल, एक तरफ जहां एनआईए की तरफ से रिमांड पर लेकर सचिन वाजे से पूछताछ की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ कई राज इस केस से जुड़े बेपर्दा होने लगे हैं. एनआईए के आईजी अनिल शुक्ला ने एक और काले रंग की मर्सिडीज के बरामद होने का दावा किया था. एनआईए के आईजी ने कहा कि ये वही मर्सिडीज है, जिसे सचिन वाजे इस्तेमाल किया करता था. एनआईए के आईजी अनिल शुक्ला ने कहा कि एनआईए ने काले रंग की मर्सिडीज बेंज बरामद की है. स्कॉर्पियों कार की नंबर प्लेट, पांच लाख से ज्यादा की कैश, एक कैश गिनने वाली मशीन और कुछ कपड़े बरामद हुए हैं.

एंटीलिया मामले में रोजाना हो रहा नया खुलासा

एनआईए सूत्रों के मुताबिक, निलंबित महाराष्ट्र के सहायक सब इंस्पेक्टर सचिन वाजे ही पीपीई किट में थे. वाजे के ड्राईवर शेलार ने यह बयान दिया है. सीसीटीवी कैमरे में जो पीपीई किट दिखा था, उसे केरोसीन से जलाया गया. सचिन वाजे ने ही उस पीपीई किट को पहन रखा था. सूत्रों के मुताबिक, मर्सिडीज कार से बहुत से फर्जी नंबर प्लेट मिली है. सचिन वाजे पीपीई किट के अंदर चेक शर्ट पहने थे, जिसे बरामद कर लिया गया है. सचिन वाजे के ड्राईवर ने इस बात की भी पुष्टि की है कि जो शर्ट बरामद हुई है उसे वाजे ने 24 तारीख को पहन रखी थी.

Posted by : Vishwat Sen

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Published Date

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