परिसीमन के खिलाफ विरोध तेज, तमिलनाडु के सीएम ने जलाई बिल की कॉपी

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 16 Apr 2026 9:10 AM

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परिसीमन के खिलाफ विरोध करते एमके स्टालिन (Photo: X)

Delimitation : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है. उन्होंने बिल जलाकर राज्यभर में आंदोलन शुरू किया. नीचे पढ़ें उन्होंने एक्स पर क्या लिखा.

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Delimitation : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन बिल का जोरदार विरोध करते हुए उसकी कॉपी जला दी. उन्होंने केंद्र के इस प्रस्तावित कानून को “काला कानून” बताया. स्टालिन का कहना है कि अगर ये लागू हुआ, तो तमिल लोगों को अपनी ही जमीन पर हाशिये पर धकेल दिया जाएगा. ये तमिल लोगों को उनकी ही धरती पर शरणार्थी बना देगा.

एमके स्टालिन ने वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की. पढ़ें उन्होंने बीजेपी को लेकर क्या कहा?

फासीवादी बीजेपी का घमंड चकनाचूर हो!

  1. तब, तमिलनाडु में हिंदी के खिलाफ जो विरोध की आग भड़की थी, उसने दिल्ली तक को झुलसा दिया था. हमारी आग तब ही शांत हुई जब दिल्ली झुकी!

2. आज, मैंने एक और आग जलाई है, उस काले कानून की प्रति जलाकर, जो तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बना देता है.

 3. ये आग भी पूरे द्रविड़ भूमि में फैलेगी और बीजेपी के घमंड को दबा देगी.

4. तमिल हमारी जन्मदात्री मां है. तमिल हमारी भाषा है और हमारे दिल के अंदर जलने वाली ताकत है.

यह भी पढ़ें : परिसीमन पर रार: यूपी में 140 तो तमिलनाडु में 58 सीटें; चिदंबरम ने आंकड़ों से सरकार को घेरा

चेन्नई में डीएमके के मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ समेत कई जगहों पर काले झंडे लगाए गए. कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम और वाइको की एमडीएमके के दफ्तरों पर भी ये झंडे दिखे. द्रमुक के सहयोगी दलों ने शहर के प्रमुख इलाकों में काले झंडे लगाकर विरोध जताया. द्रमुक के दिवंगत वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि के चेन्नई-गोपालपुरम स्थित आवास पर भी काला झंडा देखा गया. चेन्नई में मुख्यमंत्री के आवास और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के घरों पर भी काले झंडे लगे दिखे.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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