दिल्ली बनाम केन्द्र: Supreme Court ने याचिका दायर करने पर लगाई रोक, 24 नवंबर को सुनवाई करेगी संविधान पीठ

Published by : Pritish Sahay Updated At : 11 Nov 2022 5:25 PM

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच सेवाओं के विवाद से संबंधित मामले में किसी भी तरह की याचिका दायर करने पर रोक लगा दी है. दरअसल, दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के हलफनामा दायर करने पर रोक लगा दी.

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Delhi Government vs Centre: दिल्ली सरकार बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के हलफनामे पर केंद्र से जवाब तलब करने से इनकार कर दिया है. दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में सेवाओं के विवाद से संबंधित मामले में किसी भी तरह की याचिका दायर करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है.

दिल्ली सरकार ने दायर किया हलफनामा: गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने एक हलफनामा दायर किया था. उन्होंने बताया कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रशासन में पक्षाघात दिखाने के लिए एक हलफनामा दायर किया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के हलफनामा दायर करने पर रोक लगा दी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा: दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में सेवाओं के विवाद को लेकर दायर हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत इस तरह के विवाद में नहीं पड़ेगा. अदालत सिर्फ संविधान पीठ के समक्ष दिल्ली और केंद्र के बीच सेवाओं का जो विवाद हो रहा है उसपर संवैधानिक मुद्दा तय करेगी. कोर्ट ने कहा कि मामला में अब 24 नवंबर को सुनवाई होगी.

गौरतलब है कि, इससे पहले साल 2019 में तत्कालीन जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण मुद्दे पर सुनवाई की थी. अपने फैसले में जस्टिस सीकरी ने कहा था कि संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के रैंक के पदाधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों के अधीन हैं. जबकि, अन्य अधिकारी दिल्ली सरकार के नियंत्रण में हैं. लेकिन जस्टिस भूषण का फैसला इससे इतर था. उन्होंने कहा था कि प्रशासनिक सेवाएं पूरी तरह से दिल्ली सरकार के दायरे से बाहर हैं. हालांकि इसे अधूरा फैसला माना गया इसके बाद इसे तीन सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया गया था.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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