एम्स के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, 12 घंटे की सर्जरी के बाद छाती और पेट से जुड़ी जुड़वां बच्चियों को किया अलग

बच्चियों का 11 महीने की उम्र में ऑपरेशन किया गया जब वे सर्जरी की क्रिया को बर्दाश्त करने की स्थिति में पहुंच गयी थीं. डॉ बाजपेयी ने कहा कि यह सर्जरी एम्स के नये मातृ एवं बाल खंड में ‘जनरल एनीस्थेसिया’ के प्रभाव में किया गया तथा सर्जरी में नौ घंटे लगे.
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने इतिहास रच डालास है. डॉक्टरों की टीम ने छाती और पेट के उपरी हिस्से से आपस में जुड़ी दो जुड़वां बहनों -ऋिद्धि और सिद्धि को सकुशल अलग करने में सफलता हासिल की.
12 घंटे की सर्जरी के बाद बच्चों को किया गया अलग
बालचिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ मीनू बाजपेयी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बरेली की दीपिका गुप्ता जब चार महीने की गर्भवती थीं तभी पता चल गया था कि उनके गर्भ में छाती और पेट से आपस में जुड़े जुड़वां बच्चे हैं. उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें इलाज के लिए एम्स जाने की सलाह दी गयी क्योंकि स्थानीय स्तर पर उन्नत चिकित्सा सुविधाएं नहीं थीं. ये दोनों बच्चियां पिछले साल सात जुलाई को जन्मीं और दोनों पांच महीने तक गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रहीं. उन्हें 12 घंटे तक चली सर्जरी के बाद एक दूसरे से अलग किया गया. दोनों बच्चियों का पहला जन्मदिन अस्पताल में ही मनाया गया.
डॉक्टरों ने बताया, बच्चियों को अलग करना कितनी मुश्किल थी
बाल चिकित्सा सर्जरी के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ प्रबुद्ध गोयल ने कहा, यह विसंगति अजीब थी जहां पसलियां, यकृत, डायफ्रॉम आदि आपस में मिले हुए थे. दोनों के हृदय एक दूसरे के बिल्कुल करीब थे यानी करीब-करीब स्पर्श कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इन बच्चियों का 11 महीने की उम्र में ऑपरेशन किया गया जब वे सर्जरी की क्रिया को बर्दाश्त करने की स्थिति में पहुंच गयी थीं. डॉ बाजपेयी ने कहा कि यह सर्जरी एम्स के नये मातृ एवं बाल खंड में ‘जनरल एनीस्थेसिया’ के प्रभाव में किया गया तथा सर्जरी में नौ घंटे लगे एवं यदि सर्जरी पूर्व एवं पश्चात एनीस्थेसिया की अवधि को जोड़ दिया जाए तो यह करीब साढ़े बारह घंटे की अवधि है.
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बच्चियों के माता-पिता ने डॉक्टरों की टीम को दिया दिल से धन्यवाद
ये दोनों बच्चियां अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन वे अब ठीकठाक स्थिति में हैं. उनके माता-पिता दीपिका और अंकुर गुप्ता राहत की सांस ले रहे हैं और उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. दंपति ने बच्चियों को बचाने के लिए चिकित्सकों को खुले दिल से धन्यवाद दिया है. दीपिका ने कहा, जब यह सर्जरी की गयी तब हम बहुत चिंतित थे. लेकिन ईश्वर और चिकित्सकों को धन्यवाद कि हमारी बच्चियों को एक नया जीवनदान मिला.
इससे पहले भी डॉक्टरों ने कर दिखाया कमाल
यह पहली बार नहीं है, जब जुड़वां बच्चों को डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी कर अलग जीवन प्रदान किया हो. इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. पिछले साल ब्राजील के डॉक्टरों ने दो सिर, तीन हाथ और दो दिल वाले जुड़वां बच्चे को अलग किया था और उन्हें नयी जिंदगी प्रदान की थी. डॉक्टरों की टीम को 7 सर्जरी से गुजरना पड़ा था. इन बच्चों की ये सर्जरी ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल के बाल रोग सर्जन नूर उल ओवासे जिलानी की निगरानी की गई थी. सर्जरी पूरी होने में करीब 33 घंटे का समय लग गया था. जिसमें करीब 100 मेडिकल स्टाफ की टीम लगी हुई थी.
कैसे पैदा होते हैं एक साथ जुड़े हुए बच्चे
गर्भावस्था के कुछ हफ्तों में फर्टिलाइज्ड एग दो अलग-अलग भ्रूण में बंट जाते हैं. जिसके बाद उसमें अंगों के बनने का काम शुरू होता है. जिससे जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं. हालांकि कभी-कभी यह काम बीच में ही रुक जाता है, जिसके बाद कंज्वाइंड ट्विन्स पैदा होते हैं.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
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