Defense: सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए बेहतर सोच और तकनीक का ज्ञान जरूरी

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 19 Oct 2024 6:34 PM

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साइबर हमले, दुष्प्रचार अभियान और आर्थिक युद्ध बिना गोली चलाए पूरे देश को अस्थिर कर सकते हैं. ऐसे में सैन्य नेतृत्व को ऐसी चुनौतियों से निपटने में सक्षम होना होगा.

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Defense: वैश्विक स्तर पर बदलते भू-सामरिक हालात को देखते हुए भारतीय सेना को आगे की सोचने और आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के लिए तैयार रहने और हर हालात से निपटने के लिए तैयार रहना होगा. मौजूदा समय में युद्ध परंपरागत तरीके से नहीं लड़ा जा रहा है. अब युद्ध कई मोर्चे पर लड़े जाते हैं. साइबर, स्पेस और सूचना का महत्व काफी बढ़ गया है. साइबर हमले, दुष्प्रचार अभियान और आर्थिक युद्ध बिना गोली चलाए पूरे देश को अस्थिर कर सकते हैं. ऐसे में सैन्य नेतृत्व को ऐसी चुनौतियों से निपटने में सक्षम होना होगा और इससे निपटने के लिए नयी सोच विकसित करनी होगी. 62वें नेशनल डिफेंस कॉलेज में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा 

मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य अधिकारियों से सामरिक चिंतक बनने की अपील की ताकि वे भावी युद्ध के राजनीतिक पहलू को समझ सकें. भविष्य का सेना बनने के लिए तेजी से बदलते तकनीक को अपनाने की क्षमता होनी चाहिए. अब ड्रोन, मानव रहित व्हीकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य तकनीक आधुनिक युद्ध की नींव तैयार कर रहे है. भारतीय सैन्य अधिकारियों को ऐसी तकनीक की समझ होनी जरूरी है ताकि वे भावी युद्ध के लिए खुद को तैयार कर सके. 


आधुनिक तकनीक के खतरे की जानकारी होना जरूरी

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा अधिकारियों को आधुनिक तकनीक के बेहतर प्रयोग के लिए विस्तृत विश्लेषण करना चाहिए. आने वाले समय में सैन्य ऑपरेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण काफी बदल जायेगा. अधिकारियों को यह भी पता लगाना होगा कि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किस स्तर तक किया जा सकता है. सबसे अधिक चिंता की बात है कि हमारे दुश्मन ऐसी तकनीक का प्रयोग देश के खिलाफ कर सकते हैं. ऐसे में सैन्य अधिकारियों को ऐसे खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने की जरूरत है. सैन्य पाठ्यक्रमों में ऐसे खतरों से निपटने के उपायों को शामिल किया जाना चाहिए.

साथ ही सैन्य अधिकारियों को भू-राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय संबंध और वैश्विक सुरक्षा गठजोड़ के जटिल पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए. क्योंकि सैन्य अधिकारियों के फैसले से इन संबंधों पर व्यापक असर पड़ने की संभावना रहती है. अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान सिर्फ कोर्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि आधुनिक तकनीक की जानकारी हासिल करने के लिए समय-समय पर शॉर्ट टर्म कोर्स करना चाहिए.   

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