राजस्थान में दलित महिला के साथ बलात्कार, फिर एसिड डालकर लगा दी आग, मौत के बाद मचा बवाल

Edited by Rajneesh Anand
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बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने इस घटना को लेकर राजस्थान सरकार पर तीखा हमला बोला है और ट्वीट किया है- बालोतरा में दलित महिला के साथ दुष्कर्म कर उसे तेजाब से जला कर मारा गया है.

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राजस्थान के नवगठित बालोतरा जिले में एक दलित महिला के साथ बलात्कार और उसके बाद उसपर एसिड अटैक का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार आरोपी शकूर खान महिला का पड़ोसी था. उसने महिला के घर में घुसकर पहले उसके साथ हैवानियत की और फिर उसके शरीर को तेजाब से जला दिया, जिससे महिला की मौत हो गयी.

वसुंधरा राजे ने ट्‌वीट कर राजस्थान सरकार को घेरा

बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने इस घटना को लेकर राजस्थान सरकार पर तीखा हमला बोला है और ट्वीट किया है- बालोतरा में दलित महिला के साथ दुष्कर्म कर उसे तेजाब से जला कर मारा गया है. इस घटना से स्पष्ट हो गया है कि अब राजस्थान में कोई सुरक्षित नहीं है. खासकर दलित और महिलाएं तो बिलकुल भी नहीं हैं. वसुंधरा राजे ने ट्‌वीट किया है कि मानवता को शर्मसार करने वाले इस घटना को राजस्थान सरकार ने एक दिन से दबाकर रखा है जो उनके इरादे को बताता है.


परिजनों ने बवाल काटा

इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में खूब हंगामा मचाया और यह मांग की कि जबतक दोषी की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव का अंतिम संस्कार भी नहीं करेंगे और ना ही उसका पोस्टमार्टम ही करने देंगे. जानकारी के अनुसार महिला चार बच्चों की मां है, उसके परिजन धरना पर बैठ गये हैं.

आरोपी शकूर खान ने की हैवानियत

रेप के आरोपी शकूर खान ने महिला पर तेजाब डालकर आग लगा दी थी, जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर बुरी तरह जल गया था. इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गयी. महिला की मौत के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मामला दर्ज करने के लिए काफी हंगामा किया, जिसमें उनकी पुलिसकर्मियों के साथ बकझक भी हुई.

बीजेपी ने राज्य सरकार को लिया निशाने पर

बीजेपी ने इस मामले को राजस्थान सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है और सोशल मीडिया पर ट्विवटरवार चालू है. भाजपा ने एसएचओ को सस्पेंड करने की भी मांग की है. ट्‌विटर पर दलित महिला ट्रेंड भी कर रहा है, जिस हैशटैग के साथ आम लोग और बीजेपी के नेता राजस्थान सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. गौरतलब है कि कुछ दिनों से राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसे लेकर भाजपा हमलावर है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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