CSPOC: देशों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) की मेजबानी भारत करने जा रहा है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला राष्ट्रमंडल स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. यह सम्मेलन 14-16 जनवरी को होगा, जिसमें विभिन्न देशों के पीठासीन अधिकारी हिस्सा लेंगे. सम्मेलन का मुख्य मकसद पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्षता और उनकी भूमिका पर चर्चा करना है. जो 1969 में इसके गठन के समय से ही केंद्र में रहा है. वर्ष 1969 से ही सम्मेलन में इस मसले पर चर्चा होती रही है.
इस बार पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कई नये विषय जैसे संसद को जनता के करीब लाने और इससे जोड़े रखने पर केंद्रित होगा. सम्मेलन की कार्यकारी बैठक 14 जनवरी को होगी, जिसमें 15 देशों के पीठासीन अधिकारी शामिल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) के अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के चेयरपर्सन भी इसमें शामिल होंगे.
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे. राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 1969 में कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के तत्कालीन स्पीकर लुसिएन लैमूर की पहल पर हुई थी. सीएसपीओसी के स्थापना काल से ही कनाडा सम्मेलन के कार्यों के संचालन के लिए सचिवालय की सुविधा मुहैया कराता रहा है. इसमें राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हैं.
विभिन्न विषयों पर होगी चर्चा
सीएसपीओसी के तहत दो साल में एक बार पूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जाता है जिसमें सभी सदस्य देश शामिल होते हैं. पूर्ण सम्मेलन आमतौर पर जनवरी के प्रारंभ में होता है और बीच के साल में इसकी स्थायी समिति की बैठक आयोजित की जाती है. 27 वें सम्मेलन के समापन के मौके पर भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने 2026 में भारत में होने वाले 28वें सीएसपीओसी की मेजबानी का दायित्व युगांडा से हासिल किया था.
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्थायी समिति की बैठक 14 जनवरी को होगी. स्थायी समिति सीएसपीओसी की गतिविधियों की निगरानी करती है और इसमें 15 सदस्य होते हैं. इस दौरान संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग: नवाचार, निगरानी और अनुकूलन में संतुलन बनाने, सोशल मीडिया और सांसदों पर इसका प्रभाव, संसद के प्रति जन सामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नयी रणनीति और संसद सदस्यों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण पर चर्चा होगी. बिरला ने कहा कि भारत को यह मेजबानी का मौका वर्ष 1971, वर्ष 1986 और वर्ष 2010 के बाद हासिल हुआ है.
भारत की संसद 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, जहां चर्चा, संवाद, सहमति और असहमति के विचारों के साथ काम होता है. इस बार सम्मेलन पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होगा. आगामी बजट सत्र पर बिरला ने कहा कि इस बजट सत्र में सदस्यों को 22 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध होगी, और इन भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा. बजट 1 फरवरी रविवार को संसद में पेश किया जायेगा.

