जल्दबाजी ना करे भारत, 10 हफ्ते से कम रहा लॉकडाउन तो बुरे होंगे हालात, ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट ने चेताया
Author : Utpal Kant Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Apr 2020 8:59 AM
coronavirus covid-19 update, India lockdown: देश कोरोनावायरस संक्रमण से जूझ रहा है. 3 मई को भारत में लॉकडाउन(40 दिन) खत्म हो रहा है. लोगों को उम्मीद है कि जिंदगी फिर से पहले की तरह पटरी पर लौटने लगेगी. लेकिन क्या यह सही होगा? दुनिया के जाने माने हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा कि है भारत को लॉकडाउन हटाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए बल्कि कम से कम 10 हफ्ते के लिए लॉकडाउन किया जाना चाहिए
देश कोरोनावायरस संक्रमण से जूझ रहा है. 3 मई को भारत में 40 दिन का लॉकडाउन खत्म हो रहा है. लोगों को उम्मीद है कि जिंदगी फिर से पहले की तरह पटरी पर लौटने लगेगी. लेकिन क्या यह सही होगा? दुनिया के जाने माने हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा कि है भारत को लॉकडाउन हटाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए बल्कि कम से कम 10 हफ्ते के लिए लॉकडाउन किया जाना चाहिए.
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दुनिया की प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च मैगजीन लैंसेट के एडिटर इन चीफ रिचर्ड हॉर्टन ने इंडिया टुडे से लॉकडाउन और भारत में संक्रमण की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करते हुए ये बात कही है. उन्होंने कहा है कि भारत को कम से कम 10 हफ्ते यानी 70 दिन के लॉकडाउन की जरूरत है. अगर भारत ने लॉकडाउन में ढील देने में जल्दबाजी की. तो इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे.उन्होंने कहा कि वर्तमान लॉकडाउन पर खर्च किए गए समय और प्रयास को बर्बाद न करें. कम से कम 10 हफ्ते तक लॉकडाउन चलनें दें. बता दें कि भारत में इस समय लॉकडाउन का दूसरा चरण चल रहा है जो 3 मई को खत्म होगा.
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रिचर्ड हॉर्टन ने कहा कि किसी भी देश में यह महामारी हमेशा के लिए नहीं है. यह अपने आप ही खत्म हो जाएगी. हमारे देश में वायरस पर नियंत्रण के लिए सही दिशा में काम किया जा रहा है.उन्होंने कहा कि यदि भारत में लॉकडाउन सफल होता है तो आप देखेंगे कि 10 हफ्ते में यह महामारी निश्चित तौर पर खत्म हो जाएगी. यदि इसके अंत में, वायरस बंद हो जाता है, तो चीजें फिर से सामान्य हो सकती हैं. हॉर्टन ने इस बातचीत में कहा कि यह सही है कि हालात सामान्य नहीं हैं. हमें शारीरिक दूरी को बनाए रखना होगा. हमें मास्क पहनना होगा. साथ ही निजी तौर पर हाइजीन को लेकर बेहद सतर्क रहना पड़ सकता है.
इस सवाल के जवाब में कि लॉकडाउन से निकलने के लिए भारत की की सबसे अच्छी रणनीति क्या होनी चाहिए, होर्टन ने कहा- मैं मानता हूं कि हर कोई चाहता है कि जिंदगी सामान्य हो जाए. फैक्ट्रियों में काम चालू हो जाए. लेकिन मैं निवेदन करता हूं कि कृपया जल्दी न करें.उन्होंने कहा कि वर्तमान लॉकडाउन पर खर्च किए गए समय और प्रयास को बर्बाद न करें. कम से कम 10 हफ्ते तक लॉकडाउन चलनें दें.यह पूछने पर कि 40 दिन का लॉकडाउन क्यों पर्याप्त नहीं है. होर्टन ने कहा कि कोरोना अग्रेसिव वायरस है. यह रैपिडली फैलता है.
10 हफ्ते के लॉकडाउन के बाद वायरस इसलिए नहीं फैलेगा, क्योंकि बहुत कम लोगों को संक्रमण हुआ रहेगा. उन्होंने चीन के वुहान का उदाहरण देते हुए बताया कि चीन ने वुहान में 23 जनवरी को ही लॉकडाउन कर दिया था जो अप्रैल शुरुआत तक जारी रहा. अब चीन सामान्य जिंदगी की तरफ लौट गया है. महामारी का जो स्वरूप है उसमें इतना समय लगेगा ही. लोगों के घर में ज्यादा से ज्यादा रहने से कोरोना के फैलने का खतरा कम हो जाएगा. 10 हफ्ते के लॉकडाउन के बाद वायरस के फैलने की तफ्तार बहुत निचले स्तर पर आ जाएगी.
भारत में लॉकडाउन जल्द ही समाप्त होने वाली तारीख पर प्रतिक्रिया देते उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि आपको आर्थिक गतिविधि फिर से शुरू करनी होगी, लेकिन कृपया इसके लिए जल्दबाजी न करें. यदि आप लॉकडाउन को जल्दबाजी में उठाते हैं और तो आपके पास बीमारी का दूसरा चरण होगा जो पहले चरण की तुलना में और खराब हो सकता है.’ उन्होंने कहा कि हर कोई काम पर जाना चाहता है, लेकिन मैं आपसे अपील करता हूं कि आप जल्दबाजी न करें.
वैक्सीन बनने के सवाल पर होर्टन ने कहा कि यह केवल अच्छी स्थितियों में हो सकता है. ब्रिटेन में वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है. लेकिन क्या ये सही साबित होगा, हम नहीं जानते हैं. इसलिए फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क, वर्क फ्रॉम होम जैसी चीजें ही इस महामारी को फैलने से रोक सकती हैं. कोरोना का हमारी जिंदगी और हमारे समाज पर लंबे समय तक प्रभाव रहने वाला है. उन्होंने कहा कि हम टेस्ट की बात कर रहे हैं, लेकिन ये एंडीबॉडी टेस्ट नहीं है, क्योंकि इसमें पता नहीं चलता कि आपको इंफेक्शन है कि नहीं. हमें लैब में होने वाले टेस्ट की जरूरत है, जिससे पता चले कि कौन कोरोना संक्रमित है, कौन नहीं.
उन्होंने कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों और हेल्थ वर्कर्स का टेस्ट करना होगा, जिससे कोरोना के संक्रमण का पता लगाया जा सके. क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें लक्षण नहीं दिखे.
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