Cooperative: झारखंड में पैक्स के विकास के लिए केंद्र कर रहा है हर संभव मदद
Published by : Vinay Tiwari Updated At : 03 Feb 2026 7:53 PM
सहकारिता क्षेत्र में झारखंड की बात करें तो राज्य में प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) की कुल संख्या 4459 है. सभी पैक्स डेयरी और मात्स्यिकी इकाइयों की स्थापना, भांडागारों, खाद्यान्नों, उर्वरकों और बीजों के वितरण, एलपीजी, सीएनजी, पेट्रोल, डीजल डिस्ट्रीब्यूटरशिप, अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण का प्रावधान, कस्टम हायरिंग सेंटर, उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस), सामुदायिक सिंचाई सुविधाओं, कॉमन सेवा केंद्र की सुविधा मुहैया कराने के योग्य हैं.
Cooperative: देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने का काम कर रही है. सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए पैक्स का गठन, पैक्स का कंप्यूटरीकरण और कई योजना पैक्स के जरिए संचालित करने की योजना है. इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से काम हो रहा है. वहीं सहकारिता क्षेत्र में झारखंड की बात करें तो राज्य में प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) की कुल संख्या 4459 है. सभी पैक्स डेयरी और मात्स्यिकी इकाइयों की स्थापना, भांडागारों, खाद्यान्नों, उर्वरकों और बीजों के वितरण, एलपीजी, सीएनजी, पेट्रोल, डीजल डिस्ट्रीब्यूटरशिप, अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण का प्रावधान, कस्टम हायरिंग सेंटर, उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस), सामुदायिक सिंचाई सुविधाओं, कॉमन सेवा केंद्र की सुविधा मुहैया कराने के योग्य हैं.
सहकारिता क्षेत्र में झारखंड में 15 फरवरी 2023 को राष्ट्रीय योजना के अनुमोदन के बाद से 127 नए बहुउद्देशीय पैक्स (एम-पैक्स), 257 नई डेयरी सहकारी समितियां और 177 नई मात्स्यिकी सहकारी समितियां स्थापित करने का काम किया है. विकेंद्रीकृत अन्न भंडार इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत झारखंड के 50 पैक्स पैक्स के गोदामों और संबद्ध कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है. साथ ही कुल 2358 बहुउद्देशीय पैक्स को कॉमन सेवा केंद्रों (सीएससी) के तौर पर ऑनबोर्ड किया गया है.
क्या मिलता है राज्यों को लाभ
नियमों के तहत पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के तहत खाद्यान्न भंडारण के लिए कृषि विपणन अवसंरचना योजना (एएमआई) के तहत मैदानी क्षेत्रों में (7000 प्रति मीट्रिक टन लागत और 2333 प्रति मीट्रिक टन सब्सिडी) की तुलना में पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए निर्माण लागत और सब्सिडी की दरें काफी अधिक है. पहाड़ी और पूर्वी क्षेत्रों में (8,000/मीट्रिक टन लागत और 2,666 प्रति मीट्रिक टन सब्सिडी) तय की गयी है. वित्तीय व्यवहार्यता को बढ़ाने के लिए पैक्स के लिए मार्जिन मनी की आवश्यकता को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है.
दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में सीमित डिजिटल पहुंच की समस्या के समाधान के लिए नाबार्ड ने अधिक किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए बीएसएनएल के साथ एक समझौता किया गया है. साथ ही इन क्षेत्रों में पैक्स को एक संपूर्ण आईटी सुइट प्रदान करने की सुविधा है, जिसके तहत एक डेस्कटॉप पीसी, बायोमीट्रिक डिवाइस, वीपीएन और यूपीएस देने का प्रावधान है. यह जानकारी लोकसभा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक पूछे गए सवाल के जवाब में बताया.
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