संबित पात्रा ने राहुल गांधी को कहा ‘मीर जाफर’, तो पवन खेड़ा बोले-करारा जवाब मिलेगा, हम उनसे ही सीख रहे
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 21 Mar 2023 1:49 PM
सरकार विपक्ष के सवालों से बचने के लिए यह नाटक कर रही है. उन्हें चिंता है कि राहुल गांधी पीएम से अदाणी के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछ सकते हैं.
भाजपा को जल्दी ही करारा जवाब मिलेगा, हम भाजपा से ही सीख रहे हैं कि कैसे जवाब देना है. यह बयान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दिया है, वे भाजपा नेता संबित पात्रा द्वारा राहुल गांधी को आज के दौर का मीर जाफर कहने पर प्रतिक्रिया दे रहे थे.
पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार की आलोचना करना देश की आलोचना नहीं है. सरकार को यह बात समझनी चाहिए. बहस लोकतंत्र को कमजोर नहीं करती बल्कि उसे मजबूत करती है. राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना की है, देश की नहीं.
Criticizing govt is not criticizing the nation. Govt should understand this. Debate does not make democracy weaken instead it strengthens it. Govt is doing this drama because they are trying to escape the opposition's questions: Congress leader Pawan Khera pic.twitter.com/M34EV8q5Q2
— ANI (@ANI) March 21, 2023
सरकार विपक्ष के सवालों से बचने के लिए यह नाटक कर रही है. उन्हें चिंता है कि राहुल गांधी पीएम से अदाणी के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछ सकते हैं. अभी तक जेपीसी जांच नहीं हुई है, इसलिए सत्तापक्ष इतना ड्रामा कर रहा है.
गौरतलब है कि आज संबित पात्रा ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया था और उन्हें आज के दौर का मीर जाफर कहा था. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विदेश जाते हैं और लोकतंत्र के तथाकथित रखवाले देशों से कहते हैं कि आप चुप क्यों है, हमारे देश में लोकतंत्र खतरे में है. आप आइए और हमारे देश में लोकतंत्र को बचाइए और मुझे नेता बनाइए. जैसे शहजादा ईस्ट इंडिया कंपनी से मिल गया था उसी तरह राहुल गांधी विदेशी ताकतों को निमंत्रण दे रहे हैं कि आप आइए और हमारे देश के आतंरिक मामलों में दखल दीजिए.
History repeats itself!
Rahul Gandhi is today's Mir Jafar!
Just like Mir Jafar took help from East India Company to become Nawab, Rahul Gandhi is seeking 'help' from foreign nations as part of his shameful agenda.
– Dr. @sambitswaraj
Watch full video:https://t.co/UnMPG0AReW pic.twitter.com/N2X8JgUFvm
— BJP (@BJP4India) March 21, 2023
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत जब से हुई है, राहुल गांधी के ब्रिटेन में दिये बयान पर हंगामा जारी है और सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है. कांग्रेस का कहना है कि सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, राहुल गांधी ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिसपर वे माफी मांगें, सरकार सिर्फ अदाणी के मामले से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी का मुद्दा उठा रही है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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