कोविड-19 के रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल नहीं करने के ICMR के फैसले से चीन की बढ़ गयी चिंता
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Apr 2020 5:27 PM
चीन ने मंगलवार को कहा कि वह दो चीनी कंपनियों की ओर से मुहैया करायी गयी कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट के आकलन के परिणाम और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा इनका उपयोग नहीं किये जाने के फैसले से बेहद चिंतित है.
नयी दिल्ली : चीन ने मंगलवार को कहा कि वह दो चीनी कंपनियों की ओर से मुहैया करायी गयी कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट के आकलन के परिणाम और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा इनका उपयोग नहीं किये जाने के फैसले से बेहद चिंतित है. उसने उम्मीद जतायी कि भारत तार्किक एवं उचित ढंग से इस मुद्दे को सुलझाएगा. आईसीएमआर ने सोमवार को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से चीनी कंपनियों (गुआंगझू वोंडफो बायोटेक और झुहाई लिवजोन डायग्नोस्टिक) से खरीदी गयी कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल बंद करने को कहा, क्योंकि इनके परिणामों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा था.
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चीनी दूतावास की प्रवक्ता जी रोंग ने कहा कि हम आकलन के परिणामों और आईसीएमआर के फैसले से बेहद चिंतित हैं. चीन निर्यात किये गये चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता को बहुत महत्व देता है. एक बयान में उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा चीनी उत्पादों को ‘खराब’ बताना और मुद्दों को पूर्वाग्रह के साथ देखना अनुचित एवं गैर जिम्मेदाराना है. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह किन व्यक्तियों की बात कर रहीं थी.
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीन वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में भारत का समर्थन करता है और दोनों देश के लोगों को संक्रमण से जल्द से जल्द उबारने के लिए नयी दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से काम करेगा. भारत ने करीब दो हफ्ते पहले चीनी कंपनियों से करीब 5,00,000 रैपिड एंटीबॉडी जांच किट खरीदी थी और उन्हें उन राज्यों को वितरित किया गया था, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे थे. एक पत्र में आईसीएमआर ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से ये किट केंद्र सरकार को वापस करने को कहा है, ताकि इन्हें कंपनियों को लौटाया जा सके.
सरकार ने कहा कि इसमें एक भी पैसे का नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि किट की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को कोई भुगतान नहीं किया गया था. सरकार ने कहा कि उपकरणों के सही ढंग से प्रदर्शन न करने के बाद इन दो चीनी कंपनियों से किट की खरीद रद्द कर दी गयी है. अपने बयान में रोंग ने कहा कि चीनी दूतावास सही स्थिति जानने के लिए आईसीएमआर और दोनों चीनी कंपनियों के करीबी संपर्क में है. साथ ही, उन्होंने कहा कि चीन न सिर्फ कोविड-19 के खिलाफ जंग में भारत का इमानदारी से समर्थन कर रहा है, बल्कि उसकी मदद के लिए ठोस कदम भी उठा रहा है.
जी रोंग ने कहा कि इन दो चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित कोविड-19 एंटीबॉडी रैपिड जांच किट को यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में निर्यात किया गया है और इन्हें स्वीकृत भी किया गया है. उन्होंने कहा कि हमें यह भी पता चला है कि कोविड-19 एंटीबॉडी रैपिड टेस्ट किट के संचयन, परिवहन एवं प्रयोग की सख्त शर्तें हैं. उत्पाद में उल्लिखित निर्देशों के अनुरूप पेशेवरों द्वारा कोई भी काम नहीं किये जाने पर जांच परिणामों में भिन्नता आ सकती है.
चीनी दूतावास की प्रवक्ता ने उम्मीद जतायी कि भारत चीन के सद्भाव और निष्ठा का सम्मान करेगा, तथ्यों के आधार पर संबंधित चीनी कंपनियों से समय पर संवाद को मजबूत करेगा और तार्किक एवं उचित ढंग से इसे सुलझाएगा. जी रोंग ने कहा कि वायरस मानवता का साझा दुश्मन है. केवल साथ काम कर हम इस वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग जीत जाएंगे. भारत में महामारी की स्थिति के बाद चीन भी वही महसूस कर रहा है, उसने महामारी नियंत्रण, बचाव एवं इलाज संबंधी अपनी सूचनाएं साझा कीं और भारत को चिकित्सीय उपकरण दान में दिए. प्रवक्ता ने कहा कि चीन और भारत ने कोविड-19 प्रकोप के बाद से करीबी संवाद एवं सहयोग बरकरार रखा है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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