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Chhattisgarh: आरक्षण बिल पर फैसला लेंगे राज्यपाल? सीएम बघेल ने कहा- भर्तियां रुकी हैं, राजनीति अपनी जगह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज नए राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन से मुलाकात की है. मुलाकात कर उन्होंने राज्यपाल के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दों को रखा है. पत्रकारों से बात करते हुए सीएम ने बताया कि राज्यपाल के साथ मुलाकात कर हमने चार से पांच बिल पर चर्चा की है.

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने आज राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन से भेंट की है. राज्यापाल के साथ मुलाकात कर सीएम ने उनके समक्ष कई मुद्दों को पेश किया है. सामने आयी जानकारी के मुताबिक राज्यपाल से मुलाकात कर उन्होंने आरक्षण समेत राज्य में शिक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर भी बात की है. पत्रकारों के साथ जानकारी साझा करते हेउ सीएम ने बताया कि इस मुलाकात के दौरान 4 से 5 बिल पर चर्चा की गयी है. आगे बताते हुए उनहोने कहा कि- जिन बिलों पर चर्चा की गयी है उनमें यूनिवर्सिटी संशोधन बिल में अतिरिक्त लाइन जोड़ा गया है. जानकारी के लिए बता दें इस बैठक के दौरान मुख्य सचिव अमिताभ जैन और सुब्रत साहू भी मौजूद थे. रिजर्वेशन पर बात करते हुए इन अफसरों ने भी राज्यपाल को जानकारी दी.

सीएम बघेल ने दी जानकारी

राज्यपाल से मुलाकात के करने के बाद सीएम बघेल ने बताया कि- आरक्षण के मामले में हमने राज्यपाल से बात की है और उनको यह भी बताया है कि राज्य में सरकारी भर्तियां रुकी हुई हैं. आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि- हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर जल्द फैसला लिया जाए ताकि, राज्ये के हित में काम किया जा सके. राजनीती अपनी जगह पर है और सभी का उद्देश्य जनता का भलाई करना है. युवाओं का भविष्य इससे प्रभावित हो रहा है. कारण यही है कि हमने तत्काल संज्ञान लेकर फैसला करने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया है.

क्या है रिजर्वेशन का मामला

राज्य सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राज्य में विभिन्न वर्गों के आरक्षण में बढ़ोतरी कर दी थी. आरक्षण में संशोधन करने के बाद छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत, अदर बैकवर्ड क्लास (OBC) के लिए 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 4 प्रतिशत रिजर्वेशन दिया गया है. राज्यपाल के पास इस बिल को मंजूरी के लिए भेजा गया था. जिस समय इस बिल को मंजूरी के लिए भेजा गया था उस समय राज्यपाल रहीं अनुसूईया उइके ने इसे स्वीकृत करने से मना कर दिया था और इसे अपने ही रख लिया था. बिल को मंजूरी नहीं मिलने की वजह से एडवोकेट हिमांक सलूजा ने और राज्य शासन ने याचिका लगाई थी. राज्य शाशन ने राज्यपाल द्वारा आरक्षण विधेयक बिल को रोके जाने पर चुनौती दी है और इसपर सुनवाई होनी भी अभी बाकी है.

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