'संक्रमण के मामले तो होंगे कम लेकिन कोरोना के वायरस से मुक्त नहीं हो पाएगा देश, जीने के लिए बदलता रहेगा म्यूटेशन'

अब तो सवाल यह पैदा हो रहा है कि क्या कोरोना का संक्रमण फैलाने वाले वायरस से भारत कभी मुक्त नहीं हो पाएगा? इस सवाल के जवाब में देश के चिकित्सा विशेषज्ञ अपनी कुछ अलग ही राय देते हैं.
नई दिल्ली : देश-दुनिया में कोरोना महामारी की तीसरी लहर के आने की चेतावनी जारी की जा रही है. खुद भारत में ही प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ कृष्णा स्वामी विजय राघवन ने भी आशंका जाहिर की है कि देश में अक्टूबर-नवंबर महीने के दौरान कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है. इसमें उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि इस दौरान देश के ज्यादातर बच्चे संक्रमण की चेपट में आ सकते हैं. बावजूद उन्होंने मशविरा यह भी दिया है कि वैक्सीनेशन इसका कारगर उपाय है.
लेकिन, अब तो सवाल यह पैदा हो रहा है कि क्या कोरोना का संक्रमण फैलाने वाले वायरस से भारत कभी मुक्त नहीं हो पाएगा? इस सवाल के जवाब में देश के चिकित्सा विशेषज्ञ अपनी कुछ अलग ही राय देते हैं. वे कहते हैं कि आने वाले दिनों में वायरस के संक्रमण के मामले भले ही कम हो जाए, लेकिन भारत की क्या बिसात? पूरी दुनिया कभी भी कोरोना वायरस से मुक्त नहीं हो सकती. उनका कहना है कि संसार में जीने के लिए कोरोना के वायरस समय-समय पर अपना स्वरूप बदलते रहेंगे. जैसे ऑपरेशन करने के पहले हैपेटाइटिस बी और एचआईवी का टेस्ट किया जाता था, अब तीसरा कोरोना का टेस्ट होगा.
दिल्ली सरकार की ओर से संचालित लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ सुरेश कुमार ने कहा कि संक्रमण के कुछ मामले आते रहेंगे. उन्होंने कहा कि संक्रमणमुक्त होना या जीरो तक पहुंचना असंभव आंकड़ा है. वायरस का म्यूट कर रहा है या अपना स्वरूप बदल रहा है और भविष्य में इसकी चाल का अनुमान लगा पाना कठिन की ही नहीं नामुमुकिन है.
इस सवाल के जवाब में फरीदाबाद में अमृता हॉस्पिटल के रेजिडेंट मेडिकल डायरेक्टर डॉ संजीव के सिंह ने कहा कि यह एक एमआरएनए वायरस है, जो अपने स्वरूप को बदलता रहता है. ये वायरस स्मार्ट है और सिर्फ जीने के लिए स्वरूप में बदलाव करता रहेगा. उन्होंने कहा कि कोरोना की बीमारी बरकरार रहेगी और हो सकता है कि सभी 193 देशों को प्रभावित न करे, लेकिन इसकी मौजूदगी बनी रहेगी.
उन्होंने कहा कि शून्य के आंकड़े पर आना या फिर कोरोना वायरस मुक्त होना संभव नहीं होगा. अस्पतालों में सर्जरी करवाने के लिए हेपेटाइटिस और एचआईवी की जांच करवानी पड़ती है. अब कोरोना की जांच भी की जाएगी.
आईवीएफ विशेषज्ञ और ‘सीड्स ऑफ इनोसेंस’ की संस्थापक डॉ गौरी अग्रवाल ने कहा कि 1918 की महामारी को एक मानदंड के रूप में रखते हुए हमें लगता है कि पूरी तरह वायरसमुक्त होना असंभव है. संभावना यह है कि कोरोना वायरस आने वाले 12-24 महीने में कोविड-19 स्थानीय महामारी में बदलेगा और दैनिक आधार पर ऐसे आंकड़े आने बंद हो जाएंगे. इसलिए जब हम शून्य रिपोर्ट दर्ज करते हैं, तो वास्तविक तौर पर शून्य मामला कभी भी नहीं हो सकता है.
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