Covid-19 के मामलों को ‘तबलीगी जमात' के रूप में बताने से समाज में फैल रही है नफरत, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
Mumbai: Medics wearing protective suit use a thermal screening device on residents inside a slum during a nationwide lockdown in the wake of coronavirus pandemic, at Dharavi in Mumbai, Wednesday, April 15, 2020. (PTI Photo)(PTI15-04-2020_000238A)
cases of Covid-19 Citing as tabligi Jamaat : दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके प्रशासन को कुछ कोविड-19 मामलों को ‘‘तबलीगी जमात'' अथवा ‘‘मस्जिद मरकज'' के रूप में वर्गीकृत करने से रोका जाए क्योंकि यह धार्मिक तौर पर चिह्नित करने के बराबर है.
नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके प्रशासन को कुछ कोविड-19 मामलों को ‘‘तबलीगी जमात” अथवा ‘‘मस्जिद मरकज” के रूप में वर्गीकृत करने से रोका जाए क्योंकि यह धार्मिक तौर पर चिह्नित करने के बराबर है.
दिल्ली में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के करीब 1,640 मामले सामने आये हैं और अब तक 38 लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है. बृहस्पतिवार को एक वकील द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि तबलीगी के कार्यक्रम के बाद से केजरीवाल ने अपने विभिन्न ट्वीट में संक्रमण के कई मामलों को ‘‘मस्जिद मरकज” नाम के अलग शीर्षक के तहत ‘‘जानबूझकर” रखा. याचिकाकर्ता अधिवक्ता एम एम कश्यप ने दावा किया कि कोरोना वायरस के मामलों को इस तरह पेश करने से ‘‘सांप्रदायिक बैर” पनपा है और इसके कारण एक धार्मिक समुदाय विशेष के प्रति नफरत का माहौल बना है.
इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगे का दंश झेल चुकी है और जब दिल्ली में माहौल पहले से ही संवेदनशील और तनावपूर्ण है तो ऐसे में कोविड-19 के मामलों को इस तरह वर्गीकृत करने से हालात और खराब होंगे. अधिवक्ता फौजिया रहमान और एम कय्यामुद्दीन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि वक्त की जरूरत है कि देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हो. उन्होंने कहा कि ऐसे में इन मामलों को सांप्रदायिक रंग देने से यह उद्देश्य प्रभावित होगा. इस पर तत्काल रोक लगना चाहिए. इस याचिका पर 20 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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