CAA: अधिसूचना पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सीएए के खिलाफ दायर याचिकाओं पर नौ अप्रैल को होगी सुनवाई

Published by : Pritish Sahay Updated At : 19 Mar 2024 3:38 PM

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Delhi Pollution | ANI, X

CAA: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नागरिकता संशोधन नियम- 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. कोर्ट ने केन्द्र से इन आवेदनों पर तीन सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी.

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CAA: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं ने सीएए को लागू करने पर रोक लगाने की मांग की है. सीएए का विरोध कर रहे लोगों ने इसे धार्मिक विभाजन वाला बताया है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम- 2019 और नागरिक संशोधन नियम- 2024 पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 8 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की सुनवाई 9 अप्रैल को होगी.

केंद्र ने कोर्ट से मांगा समय

केंद्र सरकार ने नागरिकता नियम- 2024 के लागू होने पर रोक वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा. केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ से कहा कि उन्हें 20 आवेदनों पर जवाब देने के लिए कुछ समय चाहिए. तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि सीएए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता. इससे देश के किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी.

अधिसूचना पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सीएए पर तत्काल रोक लगाने की मांग की. उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि सीएए के तहत एक बार किसी को नागरिकता दे दी गई तो उसे वापस लेना बहुत मुश्किल होगा. ऐसे में सीएए पर अभी ही रोक लगानी चाहिए. हालांकि याचिकाकर्ताओं की नागरिकता संशोधन नियम- 2024 पर रोक लगाने की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक से संबंधित कोई आदेश पारित नहीं किया है.

याचिकाकर्ताओं का क्या है तर्क

सीएए को लेकर याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. उनका तर्क है कि इस कानून के तहत मुसलमानों को धार्मिक आधार पर अलग किया गया है. गौरतलब है कि सीएए कानून लागू होने के बाद से विपक्ष समेत कई और संगठनों ने इसका जोरदार विरोध किया है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सीएए के विरोध में खड़ी है. लीग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है.

कई सियासी दल और नेता कर रहे हैं विरोध

सीएए के खिलाफ कई दलों ने विरोध किया है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.  कांग्रेस नेता जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा, AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी समेत कई और संगठन इसके खिलाफ खड़े हैं.

क्यों हो रहा है सीएए को लेकर बवाल

सीएए को लेकर सुप्रीम में सुनवाई हो रही है. आज यानी मंगलवार को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ मामले में अब नौ अप्रैल को सुनवाई करेगी. गौरतलब है कि संसद में इस विवादास्पद कानून पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र ने 11 मार्च को इसे लागू किया था. इस कानून के मुताबिक 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है. वहीं, विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह धर्म के आधार पर भेदभाव करता है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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