केपीए के समर्थन वापसी के बाद क्या मणिपुर में गिर जाएगी बिरेन सिंह की सरकार? जानें क्या है समीकरण

Edited by Amitabh Kumar
Updated:
विज्ञापन

New Delhi: A protester holds a placard during a protest against the ongoing ethnic violence in Manipur state, in New Delhi, Friday, July 21, 2023. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI07_21_2023_000311A)

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के मद्देनजर 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विभिन्न दलों के ज्यादातर कुकी विधायकों के शामिल होने की संभावना नहीं है. इस बीच केपीए ने सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की है. जानें इसका क्या पड़गा प्रभाव

विज्ञापन

मणिपुर में हिंसा का दौर जारी है. इस बीच एनडीए के सहयोगी दल कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) ने मणिपुर में एन बिरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी है. राज्यपाल अनुसुइया उइके को लिखे एक पत्र में केपीए प्रमुख तोंगमांग हाओकिप ने सरकार से संबंध तोड़ने के पार्टी के फैसले की सूचना दी. हाओकिप ने पत्र में कहा है कि मणिपुर की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया गया है. विधानसभा में केपीए के दो विधायक हैं. इस घटनाक्रम के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या इस समर्थन वापसी की घटना के बाद सरकार गिर जाएगी.

तो आपको बता दें कि एनडीए के सहयोगी दल कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) के समर्थन वापसी से सरकार की स्थिरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 37 सदस्य हैं. वहीं, एनपीपी के सात और एनपीएफ के पांच विधायक हैं. कांग्रेस के भी पांच विधायक हैं. वहीं, 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विभिन्न दलों के ज्यादातर कुकी विधायकों के शामिल होने की संभावना नहीं है.

विधानसभा सत्र में कुकी विधायकों के भाग लेने की संभावना नहीं

खबरों की मानें तो मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के मद्देनजर 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विभिन्न दलों के ज्यादातर कुकी विधायकों के शामिल होने की संभावना नहीं है. कुकी समुदाय के नेताओं की ओर से इस बाबत जानकारी दी है. कुकी समुदाय के लोगों के लिए अलग प्रशासनिक इकाई की मांग ‘‘सर्वसम्मति’’ से खारिज करने के लिए जल्द विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग का नेतृत्व कर रहे शीर्ष मेइती संगठन ‘सीओसीओएमआई’ ने हालांकि, यह दावा किया कि यदि ‘‘आदिवासी विधायक सत्र में भाग लेना चाहते हैं’’ तो वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.

Also Read: Manipur Violence : मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, इंफाल घाटी में फिर से कर्फ्यू लगा

आपको बता दें कि मणिपुर की 60-सदस्यीय विधानसभा में कुकी-जोमी समुदाय के 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा के, दो कुकी पीपुल्स एलायंस तथा एक निर्दलीय विधायक शामिल है. जानकारों की मानें तो कुकी विधायकों की गैर-मौजूदगी से पिछले तीन महीने से चल रहे जातीय संघर्ष पर कोई सार्थक चर्चा होने की संभावना नहीं है. इस हिंसा में 160 से अधिक लोगों की जान चली गयी है.

चार मई की घटना को लेकर पांच पुलिसकर्मी निलंबित

मणिपुर पुलिस ने उस क्षेत्र के थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जहां चार मई को कुछ लोगों द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की बर्बर घटना हुई थी.

Also Read: मणिपुर में बीरेन सरकार को लगा झटका, एनडीए के सहयोगी कुकी पीपुल्स अलायंस ने लिया समर्थन वापस

फिर भड़की हिंसा, 15 घर जलाये

मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले में फिर से हिंसा भड़क उठी है. इस दौरान 15 मकान जला दिये गये. अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस घटना के बाद लांगोल गेम्स गांव में आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आयी, जिसे तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और स्थिति को काबू में किया. हिंसा के दौरान 45 वर्षीय एक व्यक्ति को गोली मारी गयी.

Also Read: मणिपुर हिंसा के खिलाफ दिल्ली में कांग्रेस का धरना, बंधु तिर्की ने पीएम नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना

हिंसा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत

गौर हो कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद प्रदेश में भड़की जातीय हिंसा अबतक जारी है. इस हिंसा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. मणिपुर में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में निवास करते हैं. जबकि, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

Also Read: मणिपुर में भड़की हिंसा! मैतेई समुदाय के 3 लोगों की हत्या, कुकी के कई घर आग के हवाले

मणिपुर में हालात पर नजर रखने वाली विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों की मानें तो हिंसा को बड़े पैमाने पर अफवाहों और फर्जी खबरों के कारण बढ़ावा मिला जिसकी वजह से मणिपुर के हालात खराब हो गये. यही वजह है कि राज्य में इंटरनेट पर तुरंत बैन लगने का फैसला सरकार की ओर से लिया गया.

विज्ञापन
Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola