Bangladesh Violence: हिंसा के बीच 4500 से ज्यादा भारतीय छात्र बांग्लादेश से लौटे भारत, हाई अलर्ट पर है बीएसएफ

Published by : Pritish Sahay Updated At : 21 Jul 2024 10:27 PM

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Bangladesh Violence

Bangladesh Violence: हिंसा के बीच 4500 से ज्यादा भारतीय छात्र बांग्लादेश से लौटे भारत.वहीं सीमा सुरक्षा बल बांग्लादेश में मौजूदा हिंसा को लेकर हाई अलर्ट पर हैं. बीएसएफ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.

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Bangladesh Violence: बांग्लादेश हिंसा में जल रहा है. सड़कों पर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच खबर है कि बांग्लादेश में रह रहे अपने नागरिकों को भारत वापस बुला रहा है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 4500 से ज्यादा भारतीय छात्र बांग्लादेश से भारत वापस लौट आएं हैं. उच्चायोग भारतीय नागरिकों की देश की सीमा तक सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था में लगा है. वहीं जितने लोग बांग्लादेश से भारत आएं हैं उनमें नेपाल के 500, भूटान के 38 और मालदीव के 1 छात्र भी शामिल हैं. बता दें, बांग्लादेश में भारतीय छात्रों की संख्या करीब 8000 है और उनमें से अधिकतर मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं. अधिकतर छात्र को मिला, ब्राह्मणबारिया और ढाका के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं. अधिकतर छात्र त्रिपुरा के रास्ते भारत में प्रवेश करने की कोशिश में हैं.

हाई अलर्ट पर है बीएसएफ
सीमा सुरक्षा बल पड़ोसी देश बांग्लादेश में मौजूदा हिंसा को लेकर हाई अलर्ट पर हैं. बीएसएफ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. बीएसएफ हाई अलर्ट पर है. बता दें, बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन में अब तक 100 से अधिक लोग मारे गए हैं. हालात को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया है. बीएसएफ के त्रिपुरा फ्रंटियर के महानिरीक्षक पटेल पीयूष पुरुषोत्तम दास ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में जवानों और सभी वरिष्ठ कमांडरों को सीमा पर भेजा गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण घटाया
लगातार हिंसा के बीच बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण रविवार को घटा दिये हैं. दरअसल 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी तक आरक्षण दिया जाता था. इधर, नौकरियों की कमी से गुस्साए प्रदर्शनकारी उस प्रणाली को खत्म करने की मांग कर रहे थे. इससे पहले साल 2018 में बड़े पैमाने पर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इसपर रोक लगा दी थी. इसके बाद इसी साल जून में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने फिर से आरक्षण बहाल कर दिया था. इसी से गुस्साए छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को अपने फैसले में कहा कि 93 फीसदी सरकारी नौकरियां योग्यता आधारित प्रणाली के आधार पर आवंटित की जाएं, पांच फीसदी 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भाग लेने वालों के परिजनों तथा अन्य श्रेणियों के लिए दो फीसदी सीटें आरक्षित रखी जाएं. बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर कई दिन से प्रदर्शन हो रहे थे और हालात बिगड़ने पर शनिवार को पूरे देश में कठोर कर्फ्यू लगा दिया गया.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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