संविधान सभा की अंतिम बैठक में बाबा साहब ने दी थी ये चेतावनी, जानिए किसे बताया था देश पर खतरा

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि भारत का संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर इसे अमल में लाने वाले लोग खराब निकले, तो संविधान निश्चित रूप से अच्छा साबित नहीं होगा.
इतिहास के पन्नों में 25 नवंबर की तारीख स्वतंत्र भारत की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज है. 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई थी. इस बैठक को संविधान की ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष और देश के पहले कानून मंत्री बाबा साहब अंबेडकर द्वारा दिए ऐतिहासिक भाषण के तौर पर भी याद किया जाता है. बताते चलें कि बाबा साहब ने अपने भाषण में देश की जिन चुनौतियों का जिक्र किया था, वह आज भी विकरालता के साथ देश के सामने मौजूद है.
देश के पहले कानून मंत्री बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि, भारत का संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर इसे अमल में लाने वाले लोग खराब निकले, तो संविधान निश्चित रूप से अच्छा साबित नहीं होगा. वहीं, अगर इसे अमल में लाने वाले अच्छे लोग रहें, तो हमारा संविधान सबसे अच्छा होगा. बाबा साहब ने संविधान सभा के आखिरी भाषण में देश में आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी को लेकर भी चिंता जाहिर की थी.
भारत 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाता है. बता दें कि भारतीय संविधान विश्व की सबसे बड़ा संविधान है. इसे तैयार करने में करीब 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे. यह 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था. हालांकि, इस दिन को साल 2015 से संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है. इससे पहले इस दिन को कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था.
आज देश जिस संविधान को मानता है, उसकी मूल कॉपी हाथों से लिखी गई थी. संविधान की पहली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से लिखी थी. बताया जाता है कि इसे लिखने में करीब 254 निब्स पेन का इस्तेमाल किया गया था. वहीं, उस समय संविधान को पूरी तरह से तैयार करने में करीब 6.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
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By Piyush Pandey
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