Assam के DGP ने विभिन्न इस्लामिक संगठनों से की मुलाकात, आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने में सहयोग मांगा

Assam: असम में आतंकियों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार की जा रही कार्रवाई के बीच पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने रविवार को राज्य भर के विभिन्न इस्लामी संगठनों से मुलाकात की और उनका समर्थन मांगा.
Assam: असम में आतंकियों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार की जा रही कार्रवाई के बीच पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने रविवार को राज्य भर के विभिन्न इस्लामी संगठनों से मुलाकात की और उनका समर्थन मांगा. असम के डीजीपी ने आतंकवादी समूहों अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) जैसे आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने में सहयोग मांगा है.
न्यूज एजेंसी एएनआइ को डीजीपी महंत ने बताया कि आज हमने राज्य भर के इस्लामिक संगठनों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि उनके सहयोग के बिना हम असम में अल-कायदा और एबीटी माड्यूल का भंडाफोड़ नहीं कर सके. हमने उनसे समर्थन और सहयोग देने का आग्रह किया और उन्होंने हमें अपने समर्थन का आश्वासन भी दिया. ऐसी खबरें थीं कि कुछ आतंकवादी धार्मिक शिक्षकों के वेश में राज्य में घुस आए थे और चुपचाप अपनी विध्वंसक और राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए थे. इसके आधार पर, राज्य पुलिस ने एक्यूआईएस और एबीटी से जुड़े 38 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी बुधवार रात को हुई जब अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम से जुड़े अजमल हुसैन नाम के एक व्यक्ति को राज्य की राजधानी गुवाहाटी से पकड़ा गया.
इन सबके बीच, असम में अधिकारियों ने तीन अलग-अलग जिलों में तीन मदरसों को इस आरोप के बाद ध्वस्त कर दिया कि उनके परिसरों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. इसके अलावा उन्हें संरचनात्मक रूप से कमजोर और मानव निवास के लिए असुरक्षित पाया गया. इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कुछ मदरसा प्रबंधन संस्था नहीं चला रहे थे. लेकिन, एक आतंकवादी केंद्र चला रहे थे.
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि मैं सामान्यीकरण नहीं करना चाहता, लेकिन जब कट्टरवाद की शिकायत आती है तो हम जांच करते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं. बता दें कि हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि 6 बांग्लादेशी नागरिक जो अंसारुल्लाह बांग्ला टीम और अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप के सदस्य हैं, ने 2016-17 में असम में प्रवेश किया. राज्य पुलिस उनमें से एक को गिरफ्तार करने में कामयाब रही थी और पांच अभी भी फरार हैं. बेहतर निगरानी के लिए, असम के मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य में आने वाले इस्लामी शिक्षकों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और इसके अलावा राज्य एक पोर्टल विकसित कर रहा है, जहां उनका विवरण दर्ज किया जाएगा.
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