Agriculture: मनरेगा को खत्म कर केंद्र सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी कानून बनाया है. सोमवार से कांग्रेस की ओर से मनरेगा खत्म करने को लेकर देशव्यापी अभियान की शुरुआत की गयी. वहीं भाजपा ने भी विपक्षी दलों के जी राम जी कानून को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान का आगाज कर दिया है. भाजपा नये कानून की खूबियों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए किसान पदयात्रा निकालने, गांव-गांव तक तथ्य के साथ नये कानून की खूबियां बताने का काम करेगी.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फिर दोहराया कि विकसित भारत-जी राम जी कानून स्वावलंबी गांवों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. तमिलनाडु के इरोड में कामगारों और श्रमिकों से संवाद के दौरान केंद्रीय मंत्री ने इस महत्वाकांक्षी योजना के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून गांवों में रोजगार सृजन, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है. जनभागीदारी के जरिये विकसित और समृद्ध गांवों का लक्ष्य साकार होगा.
उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, लेकिन कई जगहों पर न तो समय पर रोजगार और न ही मजदूरी का भुगतान समय पर हो पाता था. मनरेगा में व्याप्त कमियों और भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में बदलाव करते हुए विकसित भारत-राम जी कानून लागू करने का फैसला लिया.
नये कानून से सशक्त होगी ग्राम सभा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नये कानून के तहत 100 दिनों की बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का काम किया गया है. यही नहीं अगर निर्धारित अवधि में काम नहीं मिलता है, तो मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा. मजदूरी के भुगतान में 15 दिनों से अधिक की देरी होने पर ब्याज भी दिया जाएगा. साथ ही प्रशासनिक व्यय को 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी किया गया है ताकि जमीन पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी समय में वेतन मिल सके और व्यवस्था अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सके.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए कानून में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने का काम किया गया है. अब ग्राम सभा खुद तय करेंगी कि उनके गांव में कौन-कौन से विकास कार्य किए जाने चाहिए. विकास से जुड़े फैसले अब दिल्ली या राज्यों की राजधानी में नहीं बल्कि गांव स्तर पर होगा. कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना में बदलाव करने का फैसला मजदूरों और कामगारों के हित में लिया है. प्रधानमंत्री की कोशिश मजदूरों और कामगारों के खाते में सीधे पैसा पहुंचाने की है ताकि किसी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहे.

