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Explainer: सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर क्या कहता है कानून? SC के क्या हैं निर्देश?

इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है या उन्हें क्या सजा दी जाती है. इस बारे में कानून क्या कहता है? आइए जानें-

By Prabhat khabar Digital
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agneepath scheme protest public property damage Supreme court guidelines on row
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Agnipath Protest : सेना में भर्ती के लिए मोदी सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें फूंक दीं. देश के कई हिस्सों में रेलवे ट्रैक और सड़क जाम किया गया है. देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है या उन्हें क्या सजा दी जाती है. इस बारे में कानून क्या कहता है? आइए जानें-

क्या कहता है कानून?

इस संबंध में एक कानून है, जिसका नाम है - प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट (Prevention of Damage to Public Property Act 1984). हिंदी में इसे सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून 1984 के नाम से जानते हैं. इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे पांच साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. सार्वजनिक संपत्ति के रूप में ऐसे भवन या संपत्ति को माना गया है, जिसका उपयोग जल, प्रकाश, शक्ति या ऊर्जा उत्पादन या वितरण में किया जाता है. इसके साथ ही कोई तेल प्रतिष्ठान, खान, कारखाना, सीवरेज, कोई लोक परिवहन या दूरसंचार साधन भी सार्वजनिक संपत्ति में आते हैं. वहीं अग्नि अथवा किसी विस्फोटक पदार्थ से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले को दस साल की सजा और जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है.

नुकसान की पूरी जिम्मेदारी आरोपी की

2007 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति के बढ़ते नुकसान की घटनाओं को देखते हुए स्वतः संज्ञान लिया था. प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट (Prevention of Damage to Public Property Act 1984) को और प्रभावकारी बनाने के लिए दो उच्च स्तरीय समितियां बनायीं. 2009 में इन दोनों समितियों की महत्वपूर्ण सलाह पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए दिशा निर्देश जारी किये थे. सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में कहा सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होने पर सारी जिम्मेदारी आरोपी पर होगी. सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस केटी थॉमस की अध्यक्षता वाली समिति ने 1984 के कानून में कुछ सख्त प्रावधान भी जोड़े. नियम बने कि विद्रोहों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की घटनाओं के लिए उसके नेता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. वहीं, आंध्र प्रदेश के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ साल पहले ये निर्देश दिये कि 'अगर किसी विरोध प्रदर्शन में बड़े स्तर पर संपत्तियों की तोड़फोड़ व नुकसान को अंजाम दिया जाता है तो हाई कोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए घटना और नुकसान की जांच के आदेश दे सकता है.

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