कोरोना लॉकडाउन के चलते 61% भारतीय कर रहे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना

Author : दिल्ली ब्यूरो Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 May 2020 7:48 PM

विज्ञापन

कोविड-19 के कारण पैदा हुई परिस्थितों के बीच लोगों में आर्थिक संकट एवं नौकरी की अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है. हाल में हुए एक सर्वेक्षण की मानें, तो कोरोना लॉकडाउन के चलते 61 फीसदी भारतीय मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं.

विज्ञापन

दिल्ली ब्यूरो : कोविड-19 के कारण पैदा हुई परिस्थितों के बीच लोगों में आर्थिक संकट एवं नौकरी की अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है. हाल में हुए एक सर्वेक्षण की मानें, तो कोरोना लॉकडाउन के चलते 61 फीसदी भारतीय मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं.

जनसंपर्क एवं वितरण कंपनी द मेवेरिक्स इंडिया द्वारा लोगों पर कोरोन लॉकडाउन की बढ़ती अवधि के असर को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया गया. ई-रिबूटिंग 2020: ए स्टोरी ऑफ कोविड-19 नामक इस सर्वेक्षण में सामने आया है कि मौजूदा हालातों का सबसे अधिक प्रभाव जेड-जेनेरेशन और मिलेनियल्स (वर्ष 1990 से 2000 के बीच जन्म लेनेवाले) पर पड़ा है.

इस समय 27 फीसदी जेड-जेनेरेशन और 19 फीसदी मिलेनियल्स मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं. वहीं बेबी बूमर्स यानी वृद्धों को बेहद कम तनाव के साथ इस दौर का सामना करने के लिए तैयार देखा गया. सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि लॉकडाउन में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है. सभी लोगों के घर पर रहने और कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घरेलू कार्यों में मदद करनेवाले सहायकों को छुट्टी दे देने से महिलाओं का कार्यभार काफी बढ़ गया है.

नौकरी को लेकर बढ़ रही है चिंता : सीएक्सओ द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार अभी तक वर्क-फ्रॉम-होम का चलन पश्चिमी देशों में देखने को मिलता था, लेकिन महामारी के बाद से देशे में इस चलन को तेजी से अपनाया गया. घर से काम करने की प्रक्रिया में लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनमें तनाव का स्तर भी बढ़ रहा है. इसके अलावा महामारी के कारण हुए आर्थिक नुकसान के चलते कई संस्थान अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर रहे हैं. कईयों की नौकरी दाव पर लगी हुई है. सर्वेक्षण में शामिल 75 फीसदी लोगों का कहना है कि ऑफिस न जाने के कारण वे नौकरी को लेकर काफी चिंता का सामना कर रहे हैं.

तनाव का बड़ा कारण आर्थिक अनिश्चितता : कोरोना लॉकडाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियों में आयी रुकावट से लोगों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. सर्वेक्षण में 90 फीसदी भारतीयों ने स्वीकारा है कि देशबंदी का असर हमें लंबे समय तक देखने को मिलेगा. 72 फीसदी भारतीयों ने एक वर्ष से पहले अर्थव्यवस्था में सुधार न होने को लेकर चिंता व्यक्त की है. वहीं 26 फीसदी लोगों ने कहा है कि देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने में कम-से-कम दो वर्ष का लगेगा.

विज्ञापन
दिल्ली ब्यूरो

लेखक के बारे में

By दिल्ली ब्यूरो

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola